शनिवार का दिन शनि भगवान का समर्पित है. शनिदेव उग्र ग्रह हैं. उनको न्यायप्रिय देवता भी कहा जाता है. हिन्दू धर्म में शनि देवता को कर्म बताया गया है. मान्यताओं के मुताबिक, भक्तों के कार्य का फल शनि भगवान जरूर देते हैं. अगर आप भी शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो हम आज आपको बताएंगे ऐसे कुछ उपाय, जिन्हें अपनाकर आप शनि देव को खुश कर सकते हैं. आप शनिवार के दिन दोनों वक्त के भोजन में काला नमक और काली मिर्च का प्रयोग कर सकते हैं. शनिवार के दिन बंदरों को भुने हुए चने खिलाएं और मीठी रोटी पर तेल लगाकर काले कुत्ते को खाने को दें. यदि शनि की अशुभ दशा चल रही हो तो मांस-मदिरा का सेवन न करें. प्रतिदिन पूजा करते वक्त महामृत्युंजय मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप करें शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती हैं. घर के किसी अंधेरे भाग में किसी लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें तांबे का सिक्का डालकर रखें. शनि ढैया के शमन के लिए शुक्रवार की रात्रि में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो दें और शनिवार को प्रात : उन्हें पीसकर और गुड़ में मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और किसी काले घोड़े को खिला दें. आठ शनिवार तक यह प्रयोग करें. हर शनिवार को वट और पीपल वृक्ष के नीचे सूर्योदय से पूर्व कड़वे तेल का दीपक जलाकर शुद्ध कच्चा दूध एवं धूप अर्पित करें. शनिवार के दिन काली गाय की सेवा करें. पहली रोटी उसे खिलाएं, सिंदूर का तिलक लगाएं, सींग में मौली यानी की कलावा या रक्षासूत्र बांधे और फिर मोतीचूर के लड्डू खिलाकर उसके चरण स्पर्श करें. शनिवार को ही अपने हाथ के नाप का 29 हाथ लंबा काला धागा लेकर उसको मांझकर माला की तरह अपने गले में पहलें. यदि शनि की साढ़ेसाती से ग्रस्त हैं तो शनिवार को अंधेरा होने के बाद पीपल का मीठा जल अर्पित कर सरसों का तेल का दीपक और अगरबत्ती लगाएं और वहीं बैठकर क्रमश: हनुमान, भैरव और शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल की सात परिक्रमा करें. (एजेंसी)
