दुर्ग। शहर में अस्थाई ढंग से स्ट्रीट वेंडर सरकारी सहायता व सहमति के अपना काम और बेहतर कर सकेंगे। इस निर्णय से स्थानीय स्तर के लोगो को फायदा पहुंचेगा। यह संभव हुआ है, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत। स्थानीय सरकार द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग दिया जायेगा। वेंडर जोन बनने पर कई उन्हे 40 जगहों पर दुकानें मिलेंगी। वेंडर जोन के निर्माण की योजना अहम है। सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग प्राप्त दुकानदारों को वेंडर जोन बनने दुकान आवंटित करेगा। ताकी वे फुटपाथ से स्थायी दुकानदार बन सके। मुख्य रुप से इस योजना के द्वारा फुटपाथ पर छोटे छोटे अस्थाई दुकान लगाकर अपना परिवार चलाने वाले दुकानदारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकी वे सुदृढ़ हो सके और अपना बेहतर जीवन यापन कर सके। इन दुकानदारों को करना है योजना में शामिल सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग के लिए नगर के दुकानदारों को शामिल करना है जो अस्थाई तौर पर दुकानें लगाते है। इसमें ठेला वाले, सड़क किनारे फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले, फेरी करने वाले सभी दुकानदार शामिल है जिनका स्थाई बसेरा नही होता है। चिह्नित वेंडर को एक लाख रुपये लोन की मिलेगी सुविधा सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग प्राप्त दुकानदारों को बैंक से दस हजार से एक लाख रुपये तक की लोन की सुविधा प्राप्त होगी। योजना का उद्देश्य कोरोना महामारी में पूंजी की समस्या झेल रहे अस्थाई दुकानदारों को छोटे व्यवसाय हेतु राशि उपलब्ध कराना है। वेंडर को पहले चरण में एक साल के लिए दस हजार रुपये का लोन मिलेगा। इसमें दुकानदार को बैंक को सात प्रतिशत ही ब्याज देना है, बाकी का केन्द्र सरकार देगी। दुकानदार पहला लोन चूकता कर देते है तो दूसरे चरण में बीस हजार मिलेगा और बैंक को ब्याज मात्र तीन प्रतिशत ही देना होगा। इसके बाद तीसरे चरण में दुकानदार पचास हजार और चौथे चरण में एक लाख रुपये का लोन प्राप्त कर सकेगे।

दुर्ग भिलाई व पाटन में ऐसी योजनाएं जरूरी

दुर्ग और भिलाई के बड़े हिस्से का विकास महानगर की तर्ज पर हो रहा है। साय सरकार के लिए भी दुर्ग व भिलाई के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी प्राथमिक क्रम में रखे। सरकार इस बात से वाकिफ है, लिहाजा जनहित के ऐसे फैसले लेकर समाज ने सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया है। भौगोलिक तौर पर देखा जाए तो भिलाई, दुर्ग, पाटन रायपुर से जुड़ ही गए है। भले ही पूर्ववर्ती सरकारों ने विलंब से कनेक्टिविटी डेवलप की हो मगर सामाजिक और आर्थिक संबंध पहले से ही प्रगाढ़ रहे हैं। पर यह भी याद रखने वाली बात है कि राज्य बनने के 23 सालो में छत्तीसगढ़, खासकर भिलाई–दुर्ग की भूमिका अहम रही है। मगर स्व. अजीत जोगी, डॉक्टर रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में दुर्ग भिलाई का सामान्य ही विकास हुआ। भूपेश सरकार के पिछले पांच सालों में दुर्ग–भिलाई, पाटन व रायपुर की कनेक्टिविटी में तेजी आई। इस कनेक्टिविटी को सतत बनाए रखने दुर्ग–भिलाई , पाटन और रायपुर का समवेत और समग्र विकास किया जा सकता है।

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