अमलेश्वर (पाटन)। युवा साहित्यकार, शिक्षक हेमंत कुमार मढरिया के संयोजन में वर्तमान चुनौतियों में शिक्षकों की भूमिका विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा संपन्न हुआ। प्रारंभ में मां सरस्वती की आराधना के साथ डॉक्टर राधाकृष्णन को श्रद्धा सुमन अर्पित कर परिचर्चा के प्रथम वक्ता के रूप में राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक कृष्ण कुमार धुरंधर ने कहा कि हमें बच्चों के नैतिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए, जिससे बा्ल्य काल से ही बच्चों में मनुष्यता का गुण विकसित हो सके नवाचारी, राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक व संस्कृति कर्मी राम कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान के कोरोना वायरस संकट से लेकर अन्य विषय परिस्थितियों में शिक्षकों को उत्साहपूर्वक बच्चों की शिक्षा व राष्ट्र के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है ऋषि दधीचि का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने तो देश हित के लिए जीते जी अपनी हड्डी तक का दान गांडीव धनुष बनाने के लिए दे दिया था ऐसी स्थितियों में शिक्षकों का दायित्व निरंतर बढ़ते जा रहा है ,जिसे पूर्ण करना आवश्यक है।हर स्थिति में शासन व बालहित के लिए काम करना हम शिक्षकों का पहला और आखिरी कर्तव्य है ।
परिचर्चा को ऊंचाई प्रदान करते हुए संकुल स्रोत केंद्र पाहन्दा (अ) के संकुल शैक्षिक समन्वयक ललित कुमार बिजौरा ने कहा कि एक शिक्षक कभी भी साधारण नहीं हो सकता ऐसा इंसान जो असाधारण बनाने की क्षमता रखता है। जब जब देश, प्रदेश में समस्या आयी है शिक्षकों ने हर चुनौती का सामना करते हुए अपने भूमिका का सार्थक निर्वहन किया है । वर्तमान में पूरा देश एवम प्रदेश कोरोना के महासंकट से जूझ रहा है तथा स्कूल बंद है ऐसे में बच्चों की पढ़ाई को जारी रखते हुए तथा शासन के गाइडलाइन का पालन करते हुए ऑनलाइन पढ़ाई एवम मोहल्ला पढ़ाई के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोडऩे का कार्य शिक्षक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनौती पूर्ण कार्य को करने के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे की जरूरत है तथा अपनी क्षमता को आंकने का समय है। राष्ट्र निर्माण एवं समाज निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका है। हमें नौनिहाल बच्चों के भविष्य गढऩे में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहिए, शिक्षक की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि जीवन के लक्ष्य तक हमको जो पहुंचाते हैं, गलत सही का भेद जीवन में हमें बताते हैं, उनकी ही छत्र छाया में पलते हैं योद्धा, शिक्षक के ही इशारों पर इतिहास रचे जाते हैं। व्याख्याता पंचायत किरण चंद्राकर ने गुरु वंदना प्रस्तुत कर शिक्षक दिवस पर अपनी भावनाएं कविता के माध्यम से प्रस्तुत की। शिक्षक व मानसप्रेमी बालमुकुंद मढ़रिया ने कहा कि शिक्षक दिवस पर हमें अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण का संकल्प लेना होगा। चर्चित प्राचार्य किरण बाला वर्मा ने परिचर्चा में अपने विचारों के माध्यम से कहा कि हमें अपने व्यवहार के द्वारा समाज में आदर्श प्रस्तुत करना करने की जरूरत है। शिक्षक ही असंभव को संभव बना सकते हैं। कला शिक्षक लखेश्वर साहू ने कहा कि विद्यालय भले ही बंद है, परंतु बच्चों की पढ़ाई जारी है। यह शिक्षा समुदाय के लिए अच्छी बात है। शिक्षक ओम प्रकाश पांडेय ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के दिल में उतर कर स्नेह का प्रदर्शन करते हुए काम करते रहने का आह्वान किया। पूर्व प्राचार्य शीला शर्मा, शशि किरण बघेल, रजनी साहू, मनोज मढ़रिया, व्याख्याता देवेंद्र कुमार बंछोर ने नकारात्मक विचारों को से दूर रह कर सकारात्मक विचारों को आत्मसात करने पर बल दिया। ऑनलाइन पर चर्चा का संचालन हेमंत कुमार मढ़रिया व आभार प्रदर्शन ललित कुमार बिजौरा ने किया।
