जीवन में ऐसे कई अवसर आते हैं जब हमारे अपने ही हमारी राह में बाधा बन जाते हैं, ऐसा तब होता है जब उस संबंधी से संबंधित ग्रह अनुकूल नहीं हो! अनेक व्यक्तियों को अक्सर अपने ही लोगों के कार्यों से परेशानी होती है। कोई अपने भाई के कार्य से दुखी है तो कोई बेटे से, किसी को पत्नी से परेशानी है तो किसी को पति से, ऐसी तमाम समस्याओं से राहत मिल सकती है यदि संबंधित देव की पूजा-अर्चना की जाए…
* पिता के कारण परेशानी- सूर्य ग्रह के अकारक होने पर पिता से विरोधाभास या वैचारिक मतभेद हो सकता है। अत: सूर्योपासना द्वारा इस स्थिति से बचा जा सकता है।
* माता के कारण परेशानी- चंद्र की प्रतिकूलता के कारण माता से कष्ट संभव है। भगवान शिव की पूजा-आराधना से कष्ट मुक्ति संभव है।
* पत्नी के कारण परेशानी- यदि पत्नी से अनबन है, वैचारिक मतभेद है तो ऐसा शुक्र ग्रह के कारण हो सकता है। देवी लक्ष्मी की उपासना से ऐसे मामलों में राहत मिलती है।
* पति/बुजुर्गों से कष्ट- सामाजिक परिवर्तन के चलते दो पीढिय़ों में हमेशा विरोधाभास रहता है, किंतु ऐसा विरोधाभास जो आपको आपके मार्ग से विचलित करने लगे और पीड़ा का कारण बने तो ऐसा गुरु ग्रह के कारण होता है। इससे मुक्ति के लिए भगवान श्रीविष्णुदेव की आराधना करें। जिन्हें अपने पति से परेशानी है, वे भी भगवान श्रीविष्णुदेव की पूजा-अर्चना करें।
* सहयोगियों/कार्यकर्ताओं से परेशानी- यदि सहयोगियों और कर्मचारियों से परेशानी है तो अकारक शनिदेव के कारण संभव है। इस स्थिति में महावीर हनुमान की उपासना श्रेष्ठ है।
* पुत्र से परेशानी- केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव के कारण पुत्र से कष्ट संभव है। ऐसी स्थिति में राहत के लिए श्रीगणेश की आराधना उत्तम है।
* बहन/बेटी से परेशानी- बहन-बेटियों की पारिवारिक स्थितियां या गतिविधियों से यदि कष्ट हो तो बुध ग्रह इसका कारण है। अत: देवी पूज-उपासना करके स्थिति को सुधारा जा सकता है।
* भाई/रक्त संबंधियों से परेशानी- मंगल ग्रह की प्रतिकूलता भाई और रक्त संबंधियों से कष्ट का कारण बनती है। ऐसी स्थिति में श्रीगणेश, श्रीराम और महावीर हनुमान की आराधना से स्थिति को अनुकूल किया जा सकता है।
* दुष्ट प्रकृति के व्यक्तियों से परेशानी- यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि आपको अज्ञात शत्रुओं से भय है या आपके आसपास कुछ दुष्ट प्रकृति के व्यक्ति आपके विरुद्ध कार्य कर रहे हैं तो यह राहु के नकारात्मक प्रभाव के कारण संभव है, देवी सरस्वती की उपासना करें।
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