नई दिल्ली। मुंबई पुलिस कमिश्नर के खुलासे के बाद टीआरपी की हर तरफ चर्चा हो रही है। इन सबके बीच यह समझना जरूरी है आखिर टीआरपी का मतलब क्या है। आसान तरीके से समझें तो टीआरपी का अर्थ टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट से होता है। इसके जरिए किसी कार्यक्रम की लोकप्रियता के साथ साथ चैनलों के बारे में भी पता चलता है कि उसकी रैंकिंग क्या है। टीआरपी के दम पर चैनल खुद को सर्वश्रेष्ठ होने का दावा करते हैं। इसके साथ ही टीआरपी और विज्ञापन का भी नाता है। इसका अर्थ यह है कि जितना बेहतर टीआरपी उतना ही अधिक विज्ञापन। टीआरपी को मांपने के लिए कोई खास पैमाना नहीं है, इसके आंकड़े अनुमानित होते हैं। कुछ खास शहरों में अनुमानित सैंपल साइज को लेकर घरों में टीआरपी के मीटर लगाए जाते हैं जिन्हें हम पब्लिक मीटर भी कहते हैं। इन पब्लिक मीटर के जरिए कार्यक्रमों की लोकप्रियता तय की जाती है। ताजा खुलासे में यही आरोप लगाया गया है कि कुछ खास चैनल पैसों के दम पर टीआरपी का खेल रचाते थे। ऐसे ऐसे घरों में पब्लिक मीटर लगाए गए हैं जो वर्षों से बंद हैं। इसके साथ ही उन घरों में कुछ खास चैनलों को देखा गया है जिसके आडिएंस उस खास भाषा को नहीं समझते हैं।
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