राम विलास पासवान के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। लोकजनशक्ति पार्टी के प्रवक्ता केसी बायपेयी के अनुसार, दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना चार्टर प्लेन से 3 बजे आएगा। जनता के दर्शन के लिए पार्टी कार्यालय में रखा जाएगा। इसके बाद शाम पांच बजे दीघा में अंतिम संस्कार किया जाएगा। इससे पहले राम विलास पासवान के निधन की सूचना मिलने पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत तमाम बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। तमाम बड़े नेताओं ने शुक्रवार सुबह दिल्ली में राम विलास पासवान के निवास पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं उनके किस्से देशभर में याद किए जा रहे हैं। राम विलास पासवान को फिल्मों का भी खूब शौक था। बताते हैं कि उन्हें हॉस्टल में रहते हुए फिल्मों का चस्का लगा था। घर से आए अनाज के कुछ हिस्से को सामने के दुकानदार के पास बेचकर फिल्म देखने जाते थे। पढ़ाई पूरी होने लगी तो घर से नौकरी का दबाव भी बढऩे लगा। दरोगा बनने की परीक्षा दी, लेकिन पास न हो सके। कुछ ही दिन बाद डीएसपी की परीक्षा में पास हो गए। घर में खुशी का माहौल था लेकिन रामविलास पासवान के मन में कुछ और ही चल रहा था। उस समय गृह जिला खगडय़िा के अलौली विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना था और वह घर जाने की बजाय पहुंच गए टिकट मांगने सोशलिस्ट पार्टी के दफ्तर। उस वक्त कांग्रेस के खिलाफ लडऩे के लिए कम ही लोग तैयार हुआ करते थे। सो टिकट मिल भी गया और वे जीत भी गए। पिताजी का दबाव पुलिस अफसर बनने पर था लेकिन दोस्तों ने कहा-सर्वेंट बनना है या गवर्नमेंट, स्वयं तय करो। नतीजा सामने है। लंबी राजनीतिक यात्र रही। कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राम विलास पासवान को भारतीय राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता है। उनका सियासी सफर देखने पर साफ है कि पांच दशक से भी ज्यादा लंबे राजनीतिक करियर में वे 8 बार लोकसभा के सदस्य रहे। पिछले दो दशक में वह लगभग हर केंद्र सरकार में शामिल रहे और मंत्री भी बनें।
