रायपुर। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्यप्रदेश के 20 जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा वैज्ञानिकों ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों का गूगल मीट ऐप के माध्यम से वर्चुअल भ्रमण किया। वर्चुअल भ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्र, कांकेर, दन्तेवाड़ा, अम्बिकापुर, जगदलपुर, धमतरी, रायपुर, कवर्धा एवं महासमुन्द केन्द्रों द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों, गतिविधियों एवं समन्वित कृषि प्रणाली का वर्चुअल अवलोकन किया और इन कृषि विज्ञान केन्द्रों के रखरखाव तथा प्रबंधन की सराहना की। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की निदेशक विस्तार सेवायें डॉ. ओम गुप्ता ने मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों को छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्रों के द्वारा किसानों के हित में किये जा रहे कार्यों की तर्ज पर कार्य करने हेतु निर्देशित किया।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्रों कांकेर, जगदलपुर एवं दन्तेवाड़ा को देश के 716 कृषि विज्ञान केन्द्रों में से सर्वोत्कृष्ट कृषि विज्ञान केन्द्र का पुरस्कार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा विगत वर्षों में प्रदान किया गया है। इसी प्रकार कवर्धा, अम्बिकापुर तथा कोरिया कृषि विज्ञान केन्द्रों को उत्कृष्ट कार्यों के लिये मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों में सर्वोत्तम केन्द्रों के रूप में पुरस्कृत किया गया है।

वर्चुअल भ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से संचालित कड़कनाथ पालन इकाई, मत्स्य एवं बतख पालन इकाई, बकरी पालन, बटेर पालन, पोषण वाटिका, केंचुआ पालन, वर्मी कम्पोस्ट एवं वर्मी वाश उत्पादन, लघु धान्य फसल (कोदो, कुटकी, रागी) प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन इकाई, मखाना, सिंघाड़ा एवं कमल ककड़ी की खेती, मखाना की प्रसंस्करण इकाई, सुगंधित धान का उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाई, एजोला उत्पादन एवं अन्य कार्यों का अवलोकन किया एवं उनकी सराहना की।

कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुन्द द्वारा विकसित बटेर पालन इकाई तथा मातृ फल वाटिका, धमतरी द्वारा विकसित मखाना उत्पादन तकनीकी कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा विकसित समन्वित कृषि प्रणाली कांकेर द्वारा विकसित सेमियालता में लाख की खेती तथा प्रसंस्करण इकाई, अम्बिकापुर द्वारा विकसित केंचुआ उत्पादन इकाई, जगदलपुर तथा दन्तेवाड़ा में विकसित कोदो, कुटकी, रागी की प्रसंस्करण इकाई एवं रायपुर में विकसित बायो फ्लाक पद्धति से मछली उत्पादन इकाई से मध्यप्रदेश के वैज्ञानिक अत्यन्त प्रभावित हुये।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने अवगत कराया कि कृषि विज्ञान केन्द्र, कांकेर द्वारा विकसित पोषण वाटिका मॉडल को राज्य के सभी जिलों के विद्यालयों एवं छात्रावासों में क्रियान्वित करने के निर्देश शासन द्वारा दिये जा चुके हैं। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के निदेशक विस्तार डॉ. एस.सी. मुखर्जी, निदेशालय विस्तार के वैज्ञानिकों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों के बीच किसानों की आय वृद्धि हेतु परिचर्चा का आयोजन भी किया गया।

इस परिचर्चा में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. दीप्ति झा, डॉ. अरूण कुमार त्रिपाठी एवं डी.पी. पटेल ने सहभागिता की। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की निदेशक विस्तार सेवायें डॉ. (श्रीमती) ओम गुप्ता ने इस वर्चुअल भ्रमण एवं परिचर्चा के आयोजन हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील के प्रति आभार व्यक्त किया तथा मार्गदर्शन हेतु निदेशक विस्तार डॉ. एस.सी. मुखर्जी एवं छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया।

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