अधिक मास यानि पुरुषोत्तम मास का 16 अक्टूबर 2020 को समापन होने जा रहा है. अधिक मास में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. अधिक मास के समाप्त होते ही नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाएगा. पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष में चंद्र की कलाओं में वृद्धि होती है, वहीं कृष्ण पक्ष में चंद्रमा घटने लगता है, इसी कारण अमावस्या पर यह दिखाई नहीं देता है. पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि है. अधिक मास की अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है. अधिक मास के समापन के अगले दिन आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा. अधिकमास 18 सितंबर 2020 से शुरू हुआ था. अधिक मास का महीना 3 साल में एक बार आता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिक मास की अंतिम अमावस्या बहुत ही विशेष होती है. ऐसी मान्यता कि इस अमावस्या पर शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. ऐसा कहा जाता कि अमावस्या की तिथि पर बुरी आत्मा सक्रिय हो जाती हैं. जो नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करती हैं. इसलिए इस तिथि पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. अमावस्या की तिथि पर यात्रा करने से बचना चाहिए और वाद विवाद की स्थिति से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए. पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को शुक्रवार का दिन है और तिथि अमावस्या है. यह संयोग माता लक्ष्मी की पूजा के लिए उत्तम है. इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं. अमावस्या की तिथि में सूर्य और चंद्रमा एक राशि में गोचर करते हैं. पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को सूर्य और चंद्रमा कन्या राशि में विराजमान रहेंगे. अमावस्या पर पितरों की पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आर्शीवाद प्रदान करते हैं. इससे जीवन में आने वाली कई परेशानियों दूर होती हैं. इस दिन दान आदि का कार्य भी करना चाहिए.
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