रायपुर। वर्षा ऋतु की अंधेरी रात में साईं नगर से लेकर लाभांडी जोरा और फूंडहर आदि क्षेत्र की सड़कों पर जब अधिकांश स्ट्रीट लाइट इसलिए भी बंद रहती है क्योंकि इन लाइट्स की लाइफ कब की जवाब देने लग गई है। फिर भी ऊपर से जैसा भी अनुबंध होगा उसी लाचारी के चलते हर तरफ से आने वाली पब्लिक कंप्लेंट के प्रेशर के कारण इन बीमार हालत वाली स्ट्रीट लाइट्स को एकमात्र उपलब्ध स्ट्रीट लाइट मैकेनिक के द्वारा सुधार तो दिया जाता है, लेकिन फिर चार दिन की चांदनी और फिर अंधेरी रात जैसा हाल हो जाता है। नई स्ट्रीट लाइट रिप्लेसमेंट का तो पब्लिक नाम ही न ले तो अच्छा है क्योंकि जिन बिजली के खंभों पर पुरानी स्ट्रीट लाइट पहले से लगी हुई है तो साफ इंकार कर दिया जाता है कि वहां पुरानी लाइट को ही रिपेयर करके लगाया जाएगा। जोन नंबर 9 के एक ही वार्ड नहीं बल्कि दो-दो वार्ड क्रमांक 51 और 32 जो कि जोरा से सुदूर अवंती विहार को छूता फैला हुआ है यहां की ओवरलोडेड जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ एक-दो स्ट्रीट लाइट मैकेनिक के हवाले होकर जैसे तैसे खिंच रही है जबकि इनमें से एक मिस्त्री को तो शाम ढलते ही दृष्टि दोष के कारण ठीक से नजर भी नहीं आता है। एक- दो ही स्ट्रीट लाइट मैकेनिक जब बीमार हो जाने या फिर अन्य किसी कारणवश छुट्टी पर चले जाते हैं तो फिर उनके वापस काम पर आने के बाद ही बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को बनाने का काम हो पाता है। बरसाती रात में विषैले जीव जंतुओं का डर और ऊपर से इस क्षेत्र की कॉलोनियों की सड़कों पर पसरा अंधेरा का सन्नाटा सभी रहवासियों और विशेष रूप से छोटे-छोटे बाल बच्चों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं होता है। इसलिए शासन प्रशासन और विशेषकर नगर पालिक निगम रायपुर को इस प्रकार के बड़े-बड़े वार्डों में बड़ी संख्या में बंद पड़ी हुई स्ट्रीट लाइट्स को समय सीमा में सुधारने के लिए समुचित संख्या में अपना मानव संसाधन हर हाल में बढ़ाकर जन सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।

