आज जब कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में हलचल मचाया हुआ है। वहीं नॉर्थ कोरिया का दावा है कि उसके यहां कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं है। चीन का पड़ोसी देश होने के बावजूद नॉर्थ कोरिया का कोरोना वायरस से बचे रहना अपने आप में हैरान करने वाली बात है। अब अपुष्ट खबरों से पता चला है कि उत्तर कोरिया में भी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज हैं। जिन्हें भूखा रखा जाता है। जिसके चलते जल्दी ही उनकी जान चली जाती है। एक तरह से कहें तो सोची समझी साजिश के तहत उत्तर कोरिया में कोरोना वायरस संक्रमितों को मौत के मुंह में ढकेला जा रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं। छपी रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कोरिया में काम करने वाले ईसाई कार्यकर्ता टिम पीटर्स ने बताया कि नॉर्थ कोरिया ने चीनी सीमा के पास सीक्रेट आइसोलेशन जोन बनाया है। जहां कोरोना वायरस संक्रमितों को भेड़ बकरियों की तरह रखा जाता है। यहां उनकी कोई चिकित्सकीय देखभाल नहीं होती है। टिम पीटर्स दक्षिण कोरिया के समाजसेवी हैं और हेल्पिंग हैंड्स नाम की संस्था चलाते हैं। पीटर्स के मुताबिक नॉर्थ कोरिया में कोरोना संक्रमण को लेकर हालात बेहद गंभीर है। यहां कोरोना मरीजों को रखने के लिए सीक्रेट आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं, जहां मरीज के परिजनों की ही जिम्मेदारी खाना पहुंचाने की है। सरकारी तौर पर कोई इंतजाम न होने के कारण लोग तिल तिलकर मर रहे हैं। यहां तक कि मरीजों को परिजनों से मिलने में भी अड़चनें पैदा की जाती है। टिम पीटर्स के खुलासे के मुताबिक उत्तर कोरिया की किम जोंग सरकार की मंशा कोरोना वायरस नहीं बल्कि मरीजों के ही खात्मे की है। तभी तो कथित तौर पर संक्रमित मरीजों को उचित दवाइयां तक नहीं दी जा रही हैं। सीक्रेट आइसोलेशन सेंटर के नाम पर मौत का मुहाना तैयार किया गया है। जिसमें जाने के बाद बचकर लौटने की गुंजाइश कम ही होती है। वैसे भी संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक नॉर्थ कोरिया की 40 फीसदी आबादी भुखमरी की शिकार है और उन्हें पोषक खाना नहीं मिल पाता है। नॉर्थ कोरिया की हालत ये है कि वहां के नागरिक किसी तरह जान बचाकर दक्षिण कोरिया भाग जाते हैं। इनको भगाने में कुछ दलाल मदद भी करते हैं। किम जोंग किस कदर सनकी हैं कि उन्होंने कोरोना वायरस को भुतहा बीमारी करार दिया है।
तानाशाह कोरोना संक्रमितों को मरवा रहा
कथित तौर पर उत्तर कोरिया का एक कारोबारी चीन से लौटा था, उसे कोरोना संक्रमण हुआ तो तानाशाह किम जोंग ने उसे गोली मारने का आदेश दे दिया। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि उत्तर कोरिया में कितने मरीजों को मौत की नींद सुलाई गई है। बता दें कि उत्तर कोरिया में मीडिया पर पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण है। लिहाजा कई बातें अपुष्ट ही रह जाती है। कथित तौर पर तानाशाह किम जोंग का मानना है कि संक्रमित व्यक्ति अगर सार्वजनिक जगहों पर जाता है या फिर पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करता है तो संक्रमण फैलने का खतरा होगा। लिहाजा बेहतर है कि उसे गोली ही मार दी जाय। हालांकि पड़ोसी राज्य दक्षिण कोरिया ने कोरोना वायरस नियंत्रण के लिए उत्तर कोरिया के प्रति मदद का हाथ बढ़ाया है। बता दें कि दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण को लेकर हालात बेहद खराब है। बावजूद इसके पड़ोसी धर्म निभाते हुए उत्तर कोरिया की मदद के लिए उसके पड़ोसी तैयार हैं।

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