राजनांदगांव। संस्कारधानी के नाम से पहचाने जाने वाले राजनांदगांव शहर में इन दिनों एक और नया संस्कार पल रहा है। यह नया संस्कार न सिर्फ दीपोत्सव में शुभ दिवाली कहेगा, बल्कि एक संदेश भी मिलेगा कि, उत्सव मनाइए लेकिन कोरोना से बचकर। राजनांदगांव में बनाए जा रहे गोबर और मिट्टी के दीयों की ऐसी ही कई खूबियां हैं, जो पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगे। गोबर और मिट्टी के दीये कोरोना से बचाव संबंधी जन जागरूकता अभियान के क्रम में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, ऐसी ही सोच के साथ कलेक्टर टीके वर्मा के दिशा-निर्देश और नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक की मॉनिटरिंग में शहर के स्वच्छ क्षेत्रीय संघ की टीम इन दिनों 50,000 दीये बनाने में जुटी हुई है। गोबर और मिट्टी के दीये वैसे तो प्रदेश में कई जगह बनाए जा रहे हैं, लेकिन राजनांदगांव के 432 स्वच्छता मित्रों यानी दीदीयों के हाथों से जो दीये बनाए जा रहे हैं, उसकी बात ही अलग है। दीदीयां इन दीयों को कई तरह से डिजाइन भी कर रही हैं और इनमें सबसे चुनिंदा हैं, कोरोना से बचाव के संदेश देते रंगीन दीये। दीदीयों ने इन दीयों को अलग-अलग रंगों के साथ इतनी खूबसूरती से डिजाइन किया है कि, उस पर कोरोना से बचाव का मनुहार साफ देखा जा सकता है। दीये की डिजाइन में कोरोना वायरस, मास्क तथा दो गज दूरी के प्रतीक चिन्ह बनाकर कोरोना संक्रमण से बचने हेतु लोगों को आवश्यक नियमों के पालन कराने का प्रयास किया गया है। इस पर स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत संचालित नगर निगम के मणिकंचन केंद्र क्रमांक-5 मीलचाल की सुपरवाइजर प्रेमा सोनकर ने बताया, दीयों के निर्माण के लेकर वह बहुत उत्साहित हैं। इंतजार है कि कितनी जल्दी दिवाली आए और कब उनके हाथों से बने दीये जगमगाएं। प्रेमा ने बताया, स्वच्छ क्षेत्रीय संघ की टीम के 432 सदस्यों के हाथों से बनाए जा रहे दीये इस साल की दिवाली में नगर निगम क्षेत्र राजनांदगांव के 17 मणिकंचन केंद्रों तथा शहर के सभी सरकारी कार्यालयों के साथ ही इंदौर, नागपुर और बैंगलोर भी जगमगाएंगे। शहर में 17 जगहों पर एसएलआरएम सेंटर बनाए गए हैं और इसी का नाम मणिकंचन केंद्र रखा गया है। उन्होंने बताया, गोबर के दीये में हमने कुछ नया करने की कोशिश की है। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के संभावित खतरे से हर कोई जूझ रहा है और ऐसे में कोरोना से बचाव के प्रति लोगों को प्रेरित करना भी हमारा धर्म है, इसीलिए गोबर से निर्मित दीये के माध्यम से जागरुकता की अलख जगाने की कोशिश की है। प्रेमा ने बताया, डोर टू डोर कचरा संग्रहण कार्य के बाद गोबर के दीये और गमले बनाकर हमारी टीम एक नया बाजार बनाने का प्रयास कर रही है। दीये और गमले के लिए अब तक मिले आर्डर के अनुसार 5 लाख रुपये की मार्केटिंग की तैयारी है। मणिकंचन केंद्र मोहारा की सुपरवाइजर उषा यादव ने बताया, गोबर से बने इकोफ्रेंडली दीये उपयोग के बाद मिट्टी में आसानी से मिलकर खाद का रूप ले लेते हैं, जो गार्डनिंग करने वालों के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। दीये जलाने के बाद इसे खाद के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इंदिरा नगर सेंटर सुपरवाइजर संगीता साहू ने बताया, टीम के सदस्यों ने कच्ची मिट्टी से भी आकर्षक दीये बनाए हैं जो उपयोग के तुरंत बाद मिट्टी में आसानी से मिल जाते हैं। हमने स्टाल लगाकर भी दीया विक्रय करने की तैयारी की है। कुल 50,000 दीये बनाने के लिए टीम को 10 नवंबर तक का समय दिया गया है, इसीलिए टीम के सदस्य अलग-अलग शिफ्ट में आकर दीये भी बना रहे हैं। नवागांव सेनेट्रशन पार्क की सुपरवाइजर मुस्कान वर्मा और रेवाडीह सेंटर सुपरवाइजर अनिता फ्रांसिस कहती हैं, इस बार की दिवाली वास्तव में बहुत विशेष होने वाली है। हमारे हाथों से बने दीये कई बड़े शहरों में भी जगमगाएंगे, यह हमारे लिए गौरव का विषय है और ऐसे में यह खुशी भी हमारे लिए किसी दिवाली से कम नहीं होगी।
मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी जगमगाएंगे राजनांदगांव के दीये, दीया ऐसा भी जो कहेगा-कोरोना से बचिए…
Related Posts
chhattisgarhrajya.com
ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
Important Page
© 2025 Chhattisgarhrajya.com. All Rights Reserved.
