रायपुर। बूढ़ा तालाब में शाम को अब रंगीन नजारों के साथ स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बेचने लगाए गए स्टॉल में लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही है। अब लोग यहां सुकून, मनोरंजन और सैर-सपाटे के लिए ही नहीं पहुच रहे हैं, वे महिलाओं के हाथों विशेष रूप से तैयार स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी पकवानों का स्वाद लेने के साथ इस दीपावली के मौसम में कुछ खरीददारी के लिए भी बूढ़ा तालाब में आ रहे हैं। यहां घरों में पूजा के काम आने वाली गोबर और मिट्टी से बनी वस्तुएं तथा अन्य देखते ही पसंद आने वाली सजावटी सामानों की वेरायटी है। जो कि यहां पहुचने वालों को खूब पसंद आ रही है और लोग इसकी खरीददारी भी करने लगे हैं। विवेकानंद सरोवर-बूढ़ा तालाब के कायाकल्प के साथ लोग बड़ी सख्ंया में यहां पहुच रहे हैं। छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं, युवक-युवतियां और बड़े सभी का यहां आना-जाना लगा हुआ है। मुख्यमंत्री की पहल के बाद नए रूप में बूढ़ा तालाब सभी को लुभा रहा है। शहर के मध्य स्थित इस बूढ़ा तालाब को विकसित करने के साथ आम लोगों को मनोरंजन एवं पर्यटन की सुविधा उपलब्ध कराने विशेष पहल की गई है। यहां सभी वर्ग के आयु के लोगों का ध्यान रखा गया है।

देश के सबसे बड़े फाऊंटेन के साथ लेजर शो, रंगबिरंगी जगमगाती लाइटे, म्यूजिकल फाउंटेन और टनल फाउंटेन और विशाल प्रवेश द्वार के साथ यहां का भव्य स्वरूप सबके लिए आकर्षण का केंद्र बनती जा रही हैं। इस बूढ़ा तालाब में अब मनोरंजन के साथ लोगों को त्यौहारी सीजन में खरीददारी का मौका भी मिल गया है। यहां स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार जैविक एवं हर्बल उत्पाद आसान कीमत पर बेची जा रही है। वैसे तो समूह द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री अलग-अलग स्टालों में हो रही है लेकिन यहा सबसे आकर्षण का केंद्र ग्राम सेरीखेड़ी के उजाला ग्राम संगठन के अंतर्गत महिला समूह द्वारा तैयार उत्पादों की है। स्टालों में अलग-अलग उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध है। मीठी, नमकीन और चटपटे स्वाद वाले मिक्चर, पकवान, आचार,घर सजाने, दीया जलाने से लेकर पूजा करने सहित अन्य सामान यहां बेची जा रही है। महिलाओं द्वारा तैयार बेकरी के एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट मिठाइयां, बिस्कुट, केक, नमकीन, सेव कुकीज, गरमा-गरम पेटीज सबाके पसंद भी आ रहे हैं। सजावटी सामानों में गोबर से निर्मित आकर्षक दीये, गुलदस्ते, आकर्षक झालर भी उपलब्ध है। महिलाओं द्वारा त्यौहार की जरूरतों को ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही घर के लिए आवश्यक दैनिक जरूरतों से जुड़ी सामग्रियों को भी बेचा जा रहा है। यहां उनके स्टॉल में कोरोना के संक्रमण से बचने हर्बल सेनेटाइजर, साबुन, हैण्डवॉश, नीम, एलोविरा से निर्मित साबुन, कैण्डल, मास्क, जूट वाले बैग, अगरबत्ती, हर्बल चायपत्ती, आदि बेची जा रही है। यहां ओम इंद्राणी, सुमन,दया ध्रुव ने बताया कि सेरीखेड़ी की महिलाओं द्वारा तैयार सभी उत्पादों की डिमाण्ड लगातार बढ़ती ही जा रही है। बिहान के माध्यम से इसे आम लोगों को बिक्री किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत से तैयार अधिकांश उत्पाद प्रदूषण व केमिकल रहित है। इससे पर्यावरण और सेहत को नुकसान नहीं होता है। यहां के उत्पादों को शहर के मॉल एवं कई बाजारों में भीे बेचा जाता है। कलेक्टर डॉ एस भारतीदासन और जिला पंचायत सीईओ गौरव सिंह भी लगातार सेरीखेड़ी की महिलाओं को समूह के माध्यम से कार्य करने और आत्मनिर्भर बनने प्रोत्साहित करते रहे हैं। इसी का परिणाम है कि यहां की सैकड़ों महिलाएं स्व-सहायता समूह के माध्यम से राजेगार से जुड़ी है और आत्मनिर्भर की राह में भी आगे बढ़ रही है।

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