सडक़ दुर्घअनाओं को लेकर सरकार कोई कोताही बर्दाशत नहीं करेगी। राष्ट्रीय राजमार्गो पर एक से अधिक दुर्घटना होने पर ठेकेदारों को दंडित किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि सडक़ दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को रोकने के लिए राजमार्ग मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि बनाओ-चलाओ-हस्तांतरित करो (बीओटी) माडल के तहत बने राष्ट्रीय राजमार्गो के किसी हिस्से पर यदि एक साल में एक से अधिक दुर्घटनाएं होती है, तो ठेकेदारों को दंडित किया जाएगा। बीओटी के अंतर्गत प्राइवेट भागीदार परियोजना का डिजाइन तथा निर्माण करता है। तथा अनुबंधित अवधि के दौरान संचालन के बाद परियोजना को सरकार को स्थानांतरित कर देता है। सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग सचिव वी.उमाशंकर ने कहा कि राजमार्ग मंत्रालय ने बीओटी दस्तावेज को संशोधित किया है। अब ठेकेदारों को बीओटी माडल के तहत उनके द्वारा निर्मित राजमार्ग खंड पर निर्धारित अवधि में एक से अधिक दुर्घटनाएं होने पर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा, अगर किसी खंड, उदाहरण के लिए 500 मीटर में एक से अधिक दुर्घटनाएं होती हैं, तो ठेकेदार पर 25 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। अगले साल फिर से दुर्घटना होने पर यह जुर्माना 50 लाख हो जाएगा।
सडक़ दुर्घटना पीडि़तो को मिलेगा कैशलेस उपचार:
उमाशंकर ने यह कहा कि सरकार पयालट परियोजना में उपयुक्त संशोधन करने के बाद जल्द ही पूरे भारत में सडक़ दुर्घटना पीडि़तों के लिए कैशलेस उपचार योजना शुरू करेगी। 14 मार्च, 2024 को मंत्रालय ने चंडीगढ़ में पायलट प्राजेक्ट शुरू किया, जिसे बाद में सडक़ दुर्घटना पीडि़तों को कैशलेस उपचार प्रदान करने के लए छह राज्यों में विस्तारित किया गया था।

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