रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के साथ फेडरेशन के घटक संघ से प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष एएन शुक्ला, पेंशनर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान तथा भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष जेपी मिश्रा आदि ने आरोप लगाया है कि राज्य के 1 लाख से अधिक पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के आर्थिक लाभ को रोक कर रखने तथा विगत 20 वर्षो से पेंशनरों से सम्बंधित लंबित मामलों के निराकरण पर अब तक सत्तासीन हुये सभी राज्य सरकारों के बेरुखी के कारण पेंशनरों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस तरह सभी पेंशनरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और 4 से 6 माह पूर्व सेवानिवृत्त नये पेंशनर को बैंक भुगतान की परीक्षण प्रक्रिया में प्रकरण स्टेट बैंक भोपाल में लंबित रहने से अबतक मासिक पेंशन राशि नही मिलने के कारण सैकड़ों पेंशनरों की दीवाली फीकी रहेगी।
जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि 4 से 6 माह पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य में रिटायर हुए पेंशनरों को कोष लेखा एवं पेंशन से पी पी ओ (पेंशन पेमेंट आर्डर) जारी होने बाद भी छत्तीसगढ़ के सैकड़ों पेंशनर केवल इसलिए पेंशन से वंचित क्योंकि बैंक से भुगतान पहले प्रकरण को परीक्षण हेतु सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल स्टेट बैंक शाखा गोविंदपुरा भोपाल भेजे जाने का प्रावधान है। जिन्हें मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनो राज्य के निजी/सरकारी/सहकारी सभी बैंकों से भुगतान के लिए नोडल बैंक बनाया गया है उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरो के प्रकरणों के निपटारे में कोई रूचि नही है और जानबूझकर महीनों अपने पास लटकाये रखते है। जबकि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल की स्थापना स्थानीय बैंक में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि पेंशन प्रकरणों का भुगतान हेतु त्वरित निराकरण हो सके,परन्तु राज्य के व्यूरोक्रेसी और सरकार को पेंशनरों की समस्याओं के निदान की कोई चिन्ता नही है। इसीतरह राज्य बंटवारे के 20 वर्ष बाद भी राज्य पुनर्गठन अधिनियम धारा 49 को हटाने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रही है। सरकार पेंशनरों को केन्द्र के समान जुलाई 19 से बकाया 5 प्रतिशत महंगाई राहत और छटवें वेतनमान का 32 माह का एवं सातवे वेतनमान का 27 माह का एरियर देने में आनाकानी कर रकम दबाए बैठी हैं।जिससे प्रदेश के पेंशनरों में रोष है। जारी विज्ञप्ति में विभिन्न पेंशनर्स संगठन से जुड़े नेताओं क्रमश:गंगाप्रसाद साहू , सी एस पांडेय, आरसी पटेरिया,डॉ पीआर धृतलहरे, लोचन पांडेय, डॉ वाईसी शर्मा, यूके चौरसिया, डीके त्रिपाठी, सीएल दुबे, शरद अग्रवाल, गायत्री गोस्वामी, जेपी धुरन्धर, ज्ञानचंद पारपियानी, बीडी उपाध्याय, राकेश श्रीवास्तव, एनएच खान, द्रोपदी यादव, आरके नारद, एसपी एस श्रीवास्तव, विष्णु तिवारी,शांति किशोर माझी,विद्यादेवी साहू ,सी एल चन्द्रवंशी, श्यामलाल चौधरी,इंदु तिवारी,तीरथ यादव,रमेश नन्दे, आर पी शर्मा,असीमा कुंडू , सी एल दुबे,आशा वैष्णव,पी एल टण्डन,एल एन साहू,अशोक जैन,राजेश्वर राव भोसले,अनुप योगी,गिरीश उपाध्याय,अरुण दुबे,आलोक पांडेय, जी पी पटेल,व्ही एस जादौन,बी एल पटले,प्रकाश नामदेव,आर पी शर्मा,बी डी यादव,आनन्द भदौरिया,बी के सिन्हा, एस डी बंजारे,गुलाब राव पवार, पी एल साहू,एस के चिलमवार,बिक्रम लाल साहू, हीरालाल नामदेव,अजीत गुप्ता,श्रीमती मिलन श्याम,आदि ने मांग किया है कि सरकार पेंशनरों की समस्याओं को संज्ञान में लेकर निराकरण करें।
