महिला थाना दुर्ग में संचालित पारिवारिक परामर्श केंद्र अब केवल महिलाओं का सहारा नहीं रहा। पति-पत्नी और पारिवारिक विवादों के निपटारे में यह केंद्र पुरूषों के लिए भी उम्मीद की किरण बनता जा रहा हैं। उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत चल रहे इस केंद्र में सुलह-समझौते के प्रयासों से सैकडों परिवार टूटने से बचाए जा चुके हैं। अब की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए पहली बार पुरूष काउंसलर नियुक्त करने का फैसला लिया गया हैं। काउंसलरों का कहना है कि पहले ज्यादातर मामले पति द्वारा पत्नी को प्रताडि़त करने के होते थे। अब पुरूष भी पत्नी से मानसिक-आर्थिक प्रताडना की शिकायत लेकर थाने पहुंच रहे हैं। दरअसल यह कदम न केवल लैगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि टूटते परिवारों को जोडने की दिशा में भी मील का पत्थर साबिंत होगा।

