सनातन परंपरा में सूर्य की साधना का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि उन्हें इस जगत की आत्मा और परमपिता परमेश्वर का नेत्र माना जाता है. हिंदू धर्म में भगवान सूर्य की साधना सुख-सौभाग्य और आरोग्य की कामना को पूरा करने के लिए किया जाता है. भगवान सूर्य एक ऐसे देवता हैं, जिनके दर्शन का हमें प्रतिदिन सौभाग्य प्राप्त होता है. रविवार का दिन सूर्य देवता की पूजा के लिए समर्पित है. मान्यता है कि प्रतिदिन स्नान के बाद सूर्य को जल देने वाले व्यक्ति को कभी भी रोग, शोक और दोष नहीं लगता है.

सूर्य देवता को कैसे अर्घ्य देना चाहिए 
हिंदू मान्यता के अनुसार सूर्य देवता को जल देने के लिए व्यक्ति को प्रतिदिन स्नान-ध्यान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद ही जल देना चाहिए. सूर्य देवता को जल हमेशा तांबे के पात्र से ही देना चाहिए. सूर्य देवता को दिये जाने वाले जल में रोली, अक्षत और लाल रंग के पुष्प को डाल लेना चाहिए. इसके बाद सूर्य देवता की ओर मुख करें और सबसे पहले सूर्याय नम: मंत्र पढ़कर उनका ध्यान करते हुए उन्हें नमस्कार करें. इसके बाद दोनों हाथ से जल के पात्र को अपने सिर के उपर ले जाकर धार देते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य दें. 

सूर्य देवता को अर्घ्य देने का मंत्र 
सूर्य देवता को जल देते समय उनके नीचे दिये गये मंत्र का मन में ही पाठ करते हैं तो उसकी शुभता और पुण्य और भी ज्यादा बढ़ जाता है. 

ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते .
अनुकम्पय मां देवी गृहाणा‌र्घ्यं दिवाकर ..

सूर्य को जल देते समय कभी न करें ये गलती 
सूर्य को अक्सर लोग कहीं भी किसी भी स्थान पर जल दे देते हैं जो ​कि बिल्कुल उचित नहीं है. सूर्य देवता को हमेशा साफ और पवित्र स्थान या भूमि पर जल देना चाहिए. सूर्य देवता को जल देते समय इस बात का पूरा ध्यान रखें कि उसका जल आपके पैरों पर न गिरे और न ही किसी के पैरों के नीचे वह बाद में आए. इसके लिए आप सूर्य देवता को किसी गमले में या फिर चौड़े पात्र में जल दे सकते हैं. जल देने के बाद उस पवित्र जल को किसी पौधे में डाल दें. 

(यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

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