सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में विगत तीन वर्षों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आनलाइन ठगी के 40 से अधिक गंभीर मामले सामने आए हैं, जिसमें करीब 32 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। इनमें कुछ ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें अपराध दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और राजनांदगांव जैसे प्रमुख शहरों में बड़ी संख्या में लोग साइबर अपराधियों के निशाने पर आए हैं। ठग खुद को केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी आरोपों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उनसे बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 35 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये आरोपी गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड , मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पकड़े गए हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में ठग विदेशी काल सेंटरों की तरह काम करते हुए इंटरनेट कालिंग और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते थे। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध काल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है

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