टाटीबंध चौक ओवरब्रिज ट्रैफिक का दबाव नहीं झेल पा रहा है। सरोना की ओर की ढलान के बीच में सुधार कार्य शुरू कराया गया है। यह दूसरी बार है, जब इस ब्रिज का दूसरा स्पॉन गर्डर डेमेज होने के कारण ऐसी नौबत आई है। इससे पहले जून में बिलासपुर की ओर जाने वाले मार्ग में गड़बड़ी सामने आई थी। जबकि 200 करोड़ के ओवरब्रिज का निर्माण हुए दो साल भी नहीं हुए हैं। इसलिए क्वालिटी पर सवाल उठ रहा है, जिसका निर्माण एनएचएआई के इंजीनियरों ने कराया था। ब्रिज के बीच दायरे में काम होने के कारण ट्रेफिक को वन-वे कर दिया गया है। इससे दिन में कई बार जाम की स्थिति भी बन रही है। इस ओवरब्रिज से प्रतिदिन तीनों तरफ की ओर लगभग 70-80 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। टाटीबंध राजधानी का ऐसा चौक है, जहां से करीब 2 लाख वाहनों की आवाजाही होती है। भारी ट्रक और बस इसी चौक से निकलते हैं। यहां हादसे होने के कारण ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया। दो लेन सरोना से भिलाई तरफ और एक-एक लेन बिलासपुर साइड और एम्स तरफ यह ओवरब्रिज उतरता है। जिसमें बार-बार खराबी आ रही है। ब्रिज के बीच में जो स्पॉन गार्डर लगाया गया हैं, वह दूसरी बार हैं, जब बीच से क्रेक हुआ है। भिलाई तरफ से आने वाला ट्रैफिक जब सरोना की तरफ उतरता है, उसी लेन में स्पॉन के दोनों तरफ खोदाई कराई गई है। आधे हिस्से में लाल फीता बांधकर ट्रैफिक को एक साइड से निकालने का रास्ता बनाया गया है।

