यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह चार बजे घना कोहरा यात्रियों के लिए काल बन गया। मथुरा से नोएडा की साइड में माइल स्टोन 127 के पास एक के बाद एक, 11 वहन आपस में टकरा गए, जिसमें से नौ में आग लग गई। इससे 13 लोग जिंदा जल गए और 100 से अधिक घायल हो गए। मरने वालों में सिर्फ तीन की ही पहचान हो सकी, शेष शव कंकाल बन गए। शवों के अवशेषों को 18 बाडी बैग में पैक किया है। इनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। दुर्घटना में यह बड़ी गलती रही कि पहली कार से टक्कर के बाद उसकी सवारियां सडक़ पर ही गाड़ी चेक करने लगी थीं। कोहरे में दूसरे वाहन उनसे टकराते चले गए। दुर्घटना के समय एक्सप्रेसवे प्रशासन की यह गलती रही कि उसने दृश्य शून्यता के बावजूद वाहनों को आगे बढऩे की अनुमति दी। हादसे के बाद नोएडा की साइड में छह घंटे के लिए यातायात बंद कर दिया गया। कानपुर से वृंदावन जा रही मारूत स्विफ्ट कार बस की टक्कर के बाद अनियंत्रित हो गई। उसी समय कार को पीछे से आई मैक्स पिकअप टक्कर मारते हुए आगे निकल गई। कार सवार उतरे तभी पीछे से आई मारूति ब्रेजा कार घुस गई। ब्रेजा सवार भी कार से उतर ही पाए थे कि स्लीपर कोच बस पीछे से घुस गई। इसके बाद एक के बाद एक बसें पीछे से टकराती गईं। ब्रेजा कार को टक्कर मारने वाली स्लीपर कोच बस में आग लगी और आग ने कुछ ही देर में दूसरे वाहनों को भी चपेट में ले लिया। आग पर काबू पाने तक छह स्लीपर कोच बसें, दो रोडवेज बसें और बे्रजा कार पूरी तरह जल गईं। मरने वालों में उप्र के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के पूर्व निजी सचिव भी शामिल हैं।

