नई दिल्ली. हाईवे प्रोजेक्ट्स में सालों से चल रहा आर्बिट्रेशन (पंचाट) का शॉर्टकट रास्ता अब बंद होने जा रहा है. करोड़ों के दावों पर फैसले, लंबी सुनवाई और मनमाने अवॉर्ड पर ब्रेक लगाते हुए सरकार ने ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अब 10 करोड़ रुपये से बड़े विवादों में न पंचाट का खेल नहीं चलेगा. ऐसे मामलों में या तो आपसी समझौता करना होगा या फिर सीधे कोर्ट की चौखट पर जाना पड़ेगा. सरकार के इस फैसले से हाईवे सेक्टर में विवाद निपटारे का पूरा नियम ही बदलने वाला है.
दरअसल, सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाईवे बनाने के कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर कोई विवाद 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का हुआ, तो उसमें आर्बिट्रेशन का तरीका पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. इसका मतलब है कि ठेकेदार और सरकार के बीच बड़े झगड़ों को अब सिर्फ कंसिलिएशन या मीडिएशन से सुलझाया जाएगा. अगर इससे भी बात नहीं बनी, तो सीधे सिविल कोर्ट जाना पड़ेगा.
सभी तरह के हाईवे कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा नियम
यह नया नियम सभी तरह के हाईवे कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा- चाहे BOT-टोल मॉडल हो, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) या EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन).
लिया गया यह फैसला?
पिछले 10-15 सालों के आर्बिट्रेशन केसों की स्टडी से पता चला कि बड़े मामलों में गड़बड़ियां हो रही थीं. जैसे, कुछ लोग अनुचित प्रभाव डालकर अपने पक्ष में फैसला करवा लेते थे. 2015 से 2025 तक हाईवे सेक्टर में करीब 2600 आर्बिट्रेशन अवॉर्ड हुए, जिसमें ठेकेदारों ने 90,000 करोड़ रुपये के क्लेम किए, लेकिन अवॉर्ड सिर्फ 30,000 करोड़ रुपये का मिला. इसके अलावा, ठेकेदारों ने अभी और 1 लाख करोड़ के क्लेम आर्बिट्रेशन में डाले हैं.
वित्त मंत्रालय की गाइडलाइंस
वित्त मंत्रालय ने भी जून 2024 में गाइडलाइंस जारी की थी कि बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में आर्बिट्रेशन को रूटीन न बनाएं, और 10 करोड़ से कम के विवादों तक ही सीमित रखें. अब सड़क मंत्रालय ने इसे सख्ती से लागू कर दिया.
सरकारी निगरानी बढ़ेगी
सरकार अब उन खामियों पर भी नजर रख रही है, जिनके जरिए कुछ ठेकेदार ब्लैकलिस्ट होने या बैन होने के बाद अदालतों से अपने पक्ष में आदेश हासिल कर लेते हैं. माना जा रहा है कि नए नियम से हाईवे प्रोजेक्ट्स तेज होंगे, अनावश्यक देरी और खर्च कम होगा और गड़बड़ियां रुकेंगी.

