नए साल के नवचेतन माहौल में, नए संस्कारों और नई सोच के साथ यह भी कामना रही है कि ईश्वर धर्मांध लोगों को सद्बुद्धि दें। वे भी आत्ममंथन करें कि जिनका धर्म, आस्था भिन्न हैं, उनका भी अस्तित्व है। यह देश उनका भी है। संविधान उन्हें भी अधिकार और सुरक्षा देता है। यह देश सिर्फ धर्मांध लोगों का ही नहीं है। वे खुशफहमी में मत रहें। धर्मांधता से विपुल जन-समर्थन भी हासिल नहीं किया जा सकता। कौन हैं ये लोग, जो देश को धर्म के आधार पर परिभाषित करते रहते हैं? शाहरुख खान इस देश का महानायक है। उनके करोड़ों चहेते और प्रशंसक हैं। वह बॉलीवुड के सुपर स्टार हैं। हर साल करोड़ों रुपए का टैक्स सरकार को देते हैं। उस राशि से भी जन और समाज का कल्याण और विकास होता है। उन्हें सिर्फ इसलिए गालियां दी गईं, क्योंकि वह खान हैं। जिन्होंने उन्हें गद्दार कहा, देशद्रोही करार दिया, जेहादी जानवर तक कह दिया, वे कौन हैं? क्या इनसान को ‘जानवर’ करार दिया जा सकता है? ऐसी गालियां देने वाले कथावाचक, कथित साधु-संत और विधायक हैं। रामभद्राचार्य को ‘जगद्गुरु’ का सम्मान हासिल है। कई अति विशिष्ट लोगों को हमने उनके पांव छूते हुए, दंडवत देखा है। देवकीनंदन ठाकुर ‘कथावाचक’ हैं, लिहाजा श्रद्धालुओं का एक वर्ग उनका भी ‘भक्त’ है। नंदकिशोर गुर्जर भाजपा विधायक हैं या संगीत सोम भाजपा के ही पूर्व विधायक हैं। उनकी सार्वजनिक जिम्मेदारी गालियां देने की नहीं है। वे जन-सेवक हैं। एक महिला नेता ने घोषणा की कि जो शाहरुख खान की जीभ काट कर लाएगा, उसे एक लाख रुपए इनाम दिया जाएगा। ये हिंसक, नफरती और सांप्रदायिक बयान क्यों दिए गए? और उनका राजनीतिक नेतृत्व खामोश क्यों बैठा रहा? क्या शीर्ष से ही संकेत हुए थे कि ऐसे बयान दिए जाएं? आखिर शाहरुख खान ने क्या अपराध किया था? वह आईपीएल की ‘केकेआर टीम’ के सह-मालिक हैं। उनकी हिस्सेदारी 55 फीसदी की है, जबकि 45 फीसदी हिस्सेदारी जूही चावला एवं उनके पति जय मेहता की है। यदि ‘केकेआर’ के लिए एक बांग्लादेशी तेज गेंदबाज को अनुबंधित किया गया, तो कमोबेश शाहरुख ने कोई ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’ नहीं किया। बांग्लादेश भारत का ‘दुश्मन देश’ नहीं है। हमारे राजनयिक संबंध अब भी बरकरार हैं।

वहां की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हमारे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका गए। बांग्लादेश की तख्तापलट प्रधानमंत्री शेख हसीना बीते करीब डेढ़ साल से भारत की शरण और संरक्षण में सुरक्षित हैं। उनकी जवाबदेही किसकी है? भारत की अदाणी पॉवर, वीआईपी, डाबर, हीरो मोटरकॉर्प, इमामी आदि कई कंपनियां बांग्लादेश के साथ करीब 1 लाख करोड़ रुपए का निर्यात करती हैं। भारत बांग्लादेश से करीब 17,000 करोड़ रुपए का आयात भी करता है। यदि कुछ गालीबाज चेहरों और संगठनों को बांग्लादेशी, मुस्लिम क्रिकेटर के आईपीएल में खेलने पर आपत्ति है, तो सबसे पहले बीसीसीआई को कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए कि उसने बांग्ला खिलाडिय़ों के चयन और अनुबंध पर पाबंदी क्यों नहीं लगाई? पाकिस्तान के क्रिकेटरों पर ऐसी पाबंदी लागू है। शाहरुख क्या कर सकते हैं? वह तो खिलाडिय़ों की बोली में भी शामिल नहीं होते। फिर मु_ी भर गालीबाज लोग किसी को भी गद्दार, देशद्रोही, जेहादी जानवर कैसे करार दे सकते हैं? हमारा मानना है कि ऐसी गालियां देना ही ‘अपराध’ है, लिहाजा गालीबाजों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। बहरहाल अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने फैसला लिया है कि उनकी टीम टी-20 विश्व कप के चार मैच भारत में नहीं खेलेगी। उन्हें श्रीलंका स्थानांतरित किया जाए। अभी आईसीसी का फैसला आना है, लेकिन सितंबर में टीम इंडिया के बांग्लादेश दौरे पर बीसीसीआई का क्या निर्णय है? दरअसल यह विवाद ही नहीं है। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याएं की जा रही हैं, उनके घर-मंदिर और उनकी दुकानें जलाई जा रही हैं। प्रतिक्रिया में विहिप और कुछ अन्य हिंदूवादी संगठन भारत के शहरों में आंदोलित हैं, लेकिन उन्होंने किसी की हत्या नहीं की है। इस पर भारत के प्रधानमंत्री को वहां के शासकों को सख्त जुबान में चेतावनी देनी चाहिए थी अथवा जो वह उचित समझते, वह प्रतिक्रिया बहुत पहले दी जानी चाहिए थी।

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