चेन्नई : मद्रासहाई कोर्ट ने एक तमिल पुस्तक के प्रकाशन, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। इस किताब में हाई कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां थीं। न्यायालय ने इन टिप्पणियों को अत्यंत अपमानजनक और आपत्तिजनक बताया। हाई कोर्ट ने प्रकाशन कंपनी कीझैकत्रु पब्लिशर्स के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की। यह पुस्तक 8 जनवरी से शुरू होने वाले चेन्नई पुस्तक मेले में विमोचन के लिए निर्धारित है।

यह आदेश अधिवक्ता पी. नवीनप्रसाद की दायर याचिका पर पारित किया गया। पी नवीन प्रसाद ने आरोप लगाया कि पुस्तक की सामग्री कार्तिकई दीपम मामले में न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के दिए गए फैसले के लिए मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ निर्देशित है।

हाई कोर्ट बेंच ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की प्रथम पीठ ने कहा कि प्रथम रूप से, याचिका में उल्लिखित शीर्षक वाली प्रस्तावित पुस्तक अत्यंत अपमानजनक और आपत्तिजनक है, सभी सीमाओं को पार करती है, और न्यायालय द्वारा इस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

जस्टिस का व्यंगात्मक फोटो छापा

इस मामले का जिक्र करते हुए, वकील ने अदालत के सामने एक पर्चा पेश किया। यह पर्चा सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रहा था। पर्चे में प्रस्तावित पुस्तक की तस्वीर बनी है। इसमें न्यायमूर्ति स्वामीनाथन को खाकी रंग की पैंट पहने, एक हाथ में भगवा झंडा और दूसरे हाथ में दीपक पकड़े हुए व्यंग्यचित्र के रूप में दर्शाया गया था।

जस्टिस को बताया RSS का राउडी

तमिल में प्रकाशित पुस्तक के शीर्षक में यह सवाल उठाया गया था कि क्या जी.आर. स्वामीनाथन एक न्यायाधीश हैं या आरएसएस के गुंडे? पुस्तक के साथ ही यह दावा भी किया गया था कि 30 रुपये की यह पुस्तक चेन्नई पुस्तक मेले 2026 में उपलब्ध होगी।

रिपोर्ट में प्रकाशक का नाम और संपर्क नंबर भी दिया गया था। अधिवक्ता जगन्नाथ ने तर्क दिया कि तिरुप्परनकुंड्रम कार्तिकई दीपम मामले में 1 दिसंबर, 2025 को दिए गए उनके फैसले के कारण न्यायाधीश को व्यक्तिगत रूप से बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने अदालत से न्यायपालिका पर ऐसे हमलों को रोकने का आग्रह किया।

28 जनवरी को फिर सुनवाई

अदालत ने तमिलनाडु पुलिस को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया ताकि ऐसी कोई भी किताब प्रकाशित या प्रसारित न हो सके जिसमें अदालत या न्यायाधीश को बदनाम करने वाली तस्वीरें, बयान, व्यंग्य चित्र या अन्य सामग्री हो। अदालत ने राज्य को 28 जनवरी तक निर्देशों के अनुपालन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

अधिवक्ता पी एस रमन ने कहा कि अदालत किताब के प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश पारित कर सकती है और राज्य इसका पालन करेगा। सत्ताधारी डीएमके ने पिछले महीने विपक्षी सांसदों को एकजुट किया था और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। स्वामीनाथन ने मदुरै के तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपतून’ (दीपक जलाने के लिए पत्थर का स्तंभ) पर कार्तिकई दीपम जलाने के उनके आदेशों का बार-बार उल्लंघन करने के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
Exit mobile version