सिंचित भूमि को असिंचित दर्शाते हुए बीमा करवाने के चलते 11 किसानों को फसल बीमा नहीं मिला

दुर्ग। दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित ग्राम खेरधा के 11 अलग-अलग किसानों ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, प्राथमिक सेवा सहकारी समिति और भारतीय कृषि बीमा कंपनी लिमिटेड के विरुद्ध जिला उपभोक्ता आयोग दुर्ग के समक्ष यह शिकायत की थी कि वर्ष 2015-16 में खरीफ फसल हेतु राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के तहत उनकी धान फसल को सिंचित की बजाय असिंचित श्रेणी में दर्शाते हुए बीमा कराया गया था, इस कारण उन्हें फसल बीमा का लाभ नहीं मिला। परिवादियों की शिकायत को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रमाणित पाते हुए उनका परिवाद स्वीकार किया और सभी 11 प्रकरणों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और सेवा सहकारी समिति नारधा पर 2 लाख 56 हजार 4 सौ 65 रुपये हर्जाना लगाया।
अनावेदकगण का जवाब
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और सेवा सहकारी समिति नारधा के प्रबंधक ने आयोग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बैंक और समिति अपने कर्तव्यों का पूर्ण रूप से निर्वहन किया है और आहरित प्रीमियम राशि को नियमानुसार नियत समय के अंदर बीमा कंपनी को प्रेषित किया है बीमाधन का भुगतान करना बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है। बीमा कंपनी ने यह तर्क दिया कि राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना की शर्त और अधिसूचना के अनुसार यदि प्रीमियम काटने में किसी प्रकार की गलती अथवा त्रुटि की जाती है और इस कारण किसान लाभ से वंचित रहता है तो संबंधित वित्तीय संस्था को ही किसान की हानियों की भरपाई करना है, इसीलिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं है बल्कि त्रुटि करने वाली संस्था जिम्मेदार है।
आयोग का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने 11 प्रकरणों में यह प्रमाणित पाया कि बीमा योजना संबंधी नियम और शर्त के अनुसार फसल बीमा प्रीमियम कटौती करने और उसे अग्रेषित करने का दायित्व बैंक और समिति का था किंतु उन्होंने त्रुटि की और सिंचित श्रेणी की भूमि को असिंचित श्रेणी में शामिल करते हुए बीमा करवा दिया। असिंचित श्रेणी में वास्तविक उत्पादन अधिक होने के कारण असिंचित श्रेणी के कृषक बीमा दावा के पात्र नहीं थे किंतु सिंचित की श्रेणी में उत्पादन की कमी हुई थी इसलिए सिंचित श्रेणी के कृषक बीमा दावा प्राप्त करने के अधिकारी थे लेकिन बैंक और समिति की लापरवाही एवं त्रुटि के कारण परिवादी बीमा दावा से वंचित हुए। आयोग ने कहा कि प्रीमियम कटौती संबंधी गलती चूँकि बैंक और समिति द्वारा की गई है इसीलिए बीमा योजना के नियमानुसार ग्राहक को पहुंची क्षति की भरपाई के लिए बैंक और समिति ही उत्तरदायी हैं। आयोग ने बीमा कंपनी के विरुद्ध सभी परिवाद निरस्त कर दिए।
जिला उपभोक्ता आयोग के जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने सेवा में निम्नता के लिए जिला केंद्रीय सहकारी बैंक दुर्ग और सेवा सहकारी समिति नारधा पर 2,56,465 रुपये हर्जाना लगाते हुए ग्राम खेरधा के 11 परिवादियों के पक्ष में आदेश पारित किया, जो निम्नानुसार है :-

नाम – बीमा राशि + मानसिक क्षति + वाद व्यय = कुल हर्जाना

  1. वरुण आ.पंचराम,- 38269 + 7500 + 1000 = 46769
  2. नैनुलाल आ. निजाम,- 31918 + 6000 + 1000 = 38918
  3. तुकाराम आ. घांसीराम,- 29990 + 6000 + 1000 = 36990
  4. भूपेंद्र आ. डोमलाल,- 29990 + 6000 + 1000 = 36990
  5. गुमान आ. गैंदुराम,- 20918 + 4000 + 1000 = 25918
  6. साजिद आ. वाजिद,- 17864 + 4000 + 1000 = 22864
  7. रामेश्वर आ. सोनुराम,- 13324 + 2500 + 1000 = 16824
  8. भुनेश्वर आ. परगनिहा,- 10622 + 2000 + 1000 = 13622
  9. राजकुमार आ. फकीरा,- 5017 + 1000 + 1000 = 7017
  10. मदन आ. पल्टन,- 4640 + 1000 + 1000 = 6640
  11. दिनेश आ. तीरथ,- 1913 + 1000 + 1000 = 3913

साथ ही बीमा राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।

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