राजस्थान – माथे पर सजा अशोक स्तंभ. आत्मविश्वास से भरा चेहरा. कंधे पर चमकते सितारे और बदन पर खाकी वर्दी. भारतीय पुलिस सेवा में जेनरेशन Z का यह IPS पहली नजर में किसी कॉलेज स्टूडेंट जैसा लगता है. इसे कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालते देख लोग चौंक जाते हैं. इनका नाम अभिजीत पाटील है, जो राजस्थान कैडर में सबसे कम उम्र के IPS अधिकारी हैं.

वर्दी में देखकर भी नहीं होता भरोसा

अभिजीत पाटील को IPS की वर्दी में देखकर कई बार लोगों को भरोसा ही नहीं होता कि इतना युवा चेहरा देश में शांति व कानून व्यवस्था की कमान संभाल रहा है. अभिजीत पाटील की सक्सेस स्टोरी बाकी आईपीएस अफसरों से अलग है, क्योंकि इन्होंने UPSC की सिविल सेवा परीक्षा बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में पास की, वो भी महज 22 साल की उम्र में. 

IPS अभिजीत पाटील कहां के रहने वाले हैं?

आईपीएस अभिजीत पाटील का जन्म 11 जून 1999 को महाराष्ट्र के ठाणे शहर में हुआ है. इनके पिता तुलसीराम पाटील और माता आशा देवी सरकारी सेवा से VRS ले चुके हैं. पिता बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में चीफ ऑडिटर और मां सिंचाई विभाग में कार्यरत रही हैं. अभिजीत पाटील दो बहनों के इकलौते छोटे भाई हैं. 

UPSC में हासिल की 270वीं रैंक

अभिजीत पाटील ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 में अखिल भारतीय स्तर पर 270वीं रैंक हासिल की है. महज 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में UPSC पास कर अभिजीत पाटील राजस्थान कैडर के यंगेस्ट IPS बने हैं. राजस्थान कैडर के 2023 बैच के IPS अधिकारी अभिजीत पाटील की साल 2026 में उम्र 26 साल हो चुकी है. वे राजगढ़ से पहले जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में ASP (अंडर ट्रेनी) के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं.स्नातक के रिजल्ट से पहले पास की UPSC प्री.

अभिजीत पाटील की सफलता के मंत्र

अभिजीत पाटील आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मान लेते हैं. उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो UPSC जैसी कठिन परीक्षा भी पास की जा सकती है. इनका मानना है कि सही रणनीति, सिलेबस की गहरी समझ और निरंतर सेल्फ-स्टडी ही सफलता की असली कुंजी है. यूपीएससी की तैयारी के दौरान अभिजीत ने पांच बातों पर व‍िशेष ध्‍यान द‍िया. 

  1. लक्ष्य चुनना: अभिजीत का कहना है कि UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए. कब, क्यों और कैसे परीक्षा देनी है, इसका रोडमैप तय करने से भटकाव नहीं होता.
  2.  निरंतरता: उन्होंने रोजाना तय समय पर पढ़ाई को सबसे अहम माना. कम घंटे पढ़ाई करने के बावजूद रोजाना पढ़ने की आदत ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया.
  3. हार नहीं मानना: प्रिपरेशन के दौरान कई बार कठिन दौर आया, लेकिन अभिजीत ने असफलताओं को सीख मानकर आगे बढ़ना जारी रखा. उनके अनुसार धैर्य ही सफलता की सबसे बड़ी ताकत है.
  4. टाइम मैनेजमेंट:  अभिजीत ने सिलेबस को छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाई की. पढ़ाई, रिवीजन और मॉक टेस्ट के बीच संतुलन बनाकर समय का सही इस्तेमाल किया.
  5. पर्सनल लाइफ: वे मानते हैं कि मानसिक संतुलन जरूरी है. परिवार, दोस्तों और खुद के लिए समय निकालना तैयारी के दौरान तनाव को कम करता है और फोकस बनाए रखता है.
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