नई दिल्ली: हाई कोर्ट में जमानत याचिकाओं के लंबे समय से पेंडिंग रहने को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी उच्च न्यायालयों से ऐसे मामलों की लंबित स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है। सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वे 1 जनवरी 2025 के बाद दायर की गई सभी जमानत अर्जियों चाहे वे नियमित (रेगुलर) हों या अग्रिम (एंटीसिपेटरी) का ब्योरा पेश करें। इसमें याचिका दायर करने की तारीख, अगर फैसला हुआ है तो उसकी तारीख और अगली सुनवाई की तारीख का ब्योरा देने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर जनवरी 2025 से पहले दायर की गई जमानत याचिकाएं अब भी लंबित हैं तो उनका विवरण भी दिया जाना है। सजा निलंबन (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) की मांग करने वाली लंबित याचिकाओं का विवरण भी इसमें शामिल किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया, जो पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर एक जमानत याचिका में लगातार स्थगन (adjournments) दिए जाने के खिलाफ दाखिल की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिकाओं के निपटारे में देरी कई HC में बार-बार सामने आने वाली समस्या बन चुकी है। पटना उच्च न्यायालय में तो जमानत मामलों की त्वरित सूचीबद्धता तक नहीं होती, जिसके कारण याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर पटना HC में जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग कर रहे है।
पीठ ने कहा- कुछ दिशा-निर्देश आवश्यक है
- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर जनवरी 2025 से पहले दायर की गई जमानत याचिकाएं अब भी लंबित है तो उनका विवरण भी दिया जाना है।
- कोर्ट ने कहा कि सजा निलंबन की मांग करने वाली लंबित याचिकाओं का विवरण भी इसमें शामिल किया जाएगा।
बेल अर्जी को लेकर दिए गए थे निर्देश
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अन्ना वामन भालेराव बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में उच्च न्यायालयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि जमानत मामलों का निपटारा याचिका दायर होने के दो महीने के भीतर किया जाए। हालांकि, यह भी कहा कि लिस्टिंग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है, क्योंकि वे मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं।

