भारत टैक्सी रोजगार, मोबिलिटी, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है। यह एक जीता-जागता उदाहरण है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे देश के हित में काम कर सकता है। जैसे यूपीआई ने भुगतान को बदला, वैसे ही भारत टैक्सी जैसे ओएनडीसी पर आधारित प्लेटफॉर्म सेवा और ई-कॉमर्स को बदल देंगे…

पांच फरवरी 2026 को, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अमूल समेत कई सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर सहकारिता मंत्रालय की पहल के तौर पर भारत टैक्सी लॉन्च की। प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए भारत टैक्सी उबर और ओला की तर्ज पर टैक्सी सेवाएं प्रदान करेगी। यानी भारत टैक्सी ऐप इस्तेमाल द्वारा अब यात्री अपनी यात्रा बुक कर सकेंगे। भारत टैक्सी की खासियत यह है कि यह किसी कंपनी द्वारा चलाई गई ऐप नहीं है। इस उपक्रम के मालिक स्वयं ड्राइवर होंगे, और अब वे ड्राइवर नहीं सारथी कहलाएंगे। जो यात्रा इस ऐप के माध्यम से बुक की जाएगी उस पर सारथी यानी ड्राइवर को कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। गौरतलब है कि उबर, ओला और अन्य टैक्सी ऐप में ड्राइवरों को वर्तमान में 10 से 30 प्रतिशत तक का शुल्क देना पड़ता है। यह आत्मनिर्भर भारत और सहकार से समृद्धि की दिशा में एक मजबूत कदम है। भारत टैक्सी, जो एक कोऑपरेटिव मॉडल पर बनी है, जहां ड्राइवर सिर्फ सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि हितधारक भी हैं। पूर्व के ऐप प्लेटफॉर्म के उलट, भारत टैक्सी का मॉडल जीरो-कमीशन का है, जिससे यह पक्का होता है कि ड्राइवरों को उनकी सही कमाई मिलती रहे। भारत टैक्सी मॉडल के चार स्तंभ हैं सारथियों को ज्यादा आमदनी, सम्मान, सुरक्षा और लाभ में हिस्सा।

कैसे बढ़ेगी आमदनी : एक उदाहरण से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कैसे एक ड्राइवर उबर, ओला या किसी अन्य कंपनी के ऐप पर ट्रिप खोजते हुए काम करता है। इन ऐप्स के कारण कमीशन, आय के नुकसान के कारण नाहक शोषण का शिकार होता है। उदाहरण के लिए यदि कोई ड्राइवर दिन में 14 ट्रिप करता है और लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा करता है, जिसमें 300 रुपए प्रति ट्रिप का औसत किराया होता है, जिसका मतलब लगभग 14-15 घंटे काम करना हो सकता है, तो उसे 4200 रुपए की आय होगी। लेकिन यह आय वास्तव में उसकी नहीं है, वास्तव में इस आय का आधा भी उसका नहीं है। वास्तव में कंपनी औसतन इस आय का लगभग 25 प्रतिशत प्लेटफॉर्म शुल्क के रूप में लेती है, यानी 1050 रुपए सीधे कंपनी को जाते हैं। फिर, ड्राइवर को टैक्सी चलाने के लिए पेट्रोल/सीएनजी का भुगतान करना पड़ता है, 4 रुपए प्रति किलोमीटर माने तो लगभग 1000 रुपए। या फिर अगर कार किसी बैंक या संस्था से फाइनेंस करवाई गई है तो ईएमआई देनी पड़ सकती है और मेंटेनेंस के लिए भी रकम खर्च करनी पड़ सकती है। इसलिए, ड्राइवर को एक दिन में 14-15 घंटे काम करने पर सिर्फ 1150 रुपए बचेंगे, औसतन लगभग 80-85 रुपए प्रति घंटा। अब, भारत टैक्सी से जुडऩे वाले ड्राइवरों के बिना किसी कमीशन मॉडल के, अच्छे-खासी राशि की कमीशन बचाने से, उतने काम से उनकी आमदनी बढक़र 2150 रुपए प्रति दिन हो जाएगी, यानी 160 से 170 रुपए प्रति घंटा। इससे वह ज्यादा आराम के घंटे चुन सकते हैं, जिन्हें वह अपने परिवार के साथ बिता सकते हैं, जिससे उनका आराम और इनकम दोनों बेहतर होंगे। इसलिए, भारत टैक्सी न सिर्फ ड्राइवर, जो अब सारथी है, की आमदनी बेहतर करती है, बल्कि उसकी और उसके परिवार की खुशी भी बढ़ाती है।

सम्मान : सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब ड्राइवर को सम्मान के साथ काम मिलेगा। अब वो इस सहकारी टैक्सी सेवा हेतु बनी सहकारी समिति का स्वयं सदस्य भी होगा। यह मोबिलिटी इकोसिस्टम की रीढ़ ड्राइवर को सम्मान वापस दिलाता है, जिसके वो हकदार हैं।

सुरक्षा : यही नहीं अब भारत टैक्सी से जुड़े सारथियों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज, बीमा, सस्ते लोन, सब्सिडी और गिग वर्कर्स के लिए सभी स्कीम जैसे फायदे मिलेंगे।

लाभ में हिस्सेदारी : चूंकि भारत टैक्सी मॉडल में ड्राइवर यानी सारथी अब स्वयं भारत टैक्सी सहकारी संस्था के सदस्य होंगे, उन्हें इसके लाभों में भी बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी। ये हिस्सेदारी अमूल मॉडल की तर्ज पर होगी। सर्वविदित है कि अमूल मॉडल में दुग्ध उत्पादक किसानों को अमूल सहकारी संस्था में न केवल दूध का सही मूल्य मिलता है, बल्कि उसके लाभ में भी हिस्सेदारी मिलती है।

यात्रियों को फायदा : अपना मुनाफा ज्यादा से ज्यादा करने के लिए, टैक्सी प्लेटफॉर्म आम तौर पर ज्यादा मांग के नाम पर सर्ज प्राइसिंग करते हैं, जिससे यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ता है, कभी-कभी तो सामान्य किराए से 2 से 3 गुना ज्यादा। भारत टैक्सी के साथ यह तरीका खत्म हो जाएगा, जिससे यात्रियों को ज्यादा मांग के नाम पर ऊंचा किराया देने से राहत मिल जाएगी।

सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत टैक्सी ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) पर बनी है, जो कि फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसे कोऑपरेशन मंत्रालय की देखरेख में विकसित किया गया है। ओएनडीसी एक खुला, पारदर्शी और एकाधिकार विहीन डिजिटल फ्रेमवर्क है, जो भारत के खुलेपन और निष्पक्षता के सभ्यागत मूल्यों के साथ जुड़ा हुआ है। ओएनडीसी बंद प्लेटफॉर्म के दबदबे को तोड़ता है और छोटे ऑपरेटरों और कोऑपरेटिव के लिए बराबर मौके पक्का करता है। भारत टैक्सी का ओएनडीसी फ्रेमवर्क पर चलाया जाना इस आशा को भी बलवती करता है कि ई-कॉमर्स के अन्य क्षेत्रों में भी सहकारिता के आधार पर ही डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से निजी काम करने वाले लोगों, जैसे छोटे व्यापारियों, रेहड़ी पटरी विक्रेताओं, और बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, एसी मरम्मत करने वालों जैसे अन्य कर्मियों को संगठित कर उनकी आमदनी को बढ़ाया जा सकता है और उन्हें सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिया जा सकता है।

भारत टैक्सी, एक गेम चेंजर : भारत टैक्सी का जीरो कमीशन मॉडल यह सुनिश्चित करेगा कि उबर ओला जैसी कंपनियां भी अपनी कमीशन को कम करें और ड्राइवरों की ज्यादा आमदनी सुनिश्चित करें। यही नहीं भारत टैक्सी का यह मॉडल विश्व का भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है कि दूसरे देश भी इस मॉडल को अपनाकर मोबिलिटी सेवाओं में शोषण की समाप्ति कर सकें। कोऑपरेटिव ओनरशिप मॉडल शोषण को रोकता है और लंबे समय तक चलने वाली टिकाऊ व्यवस्था को पक्का करता है। जैसा कि यह योजना है कि भारत टैक्सी को छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों तक ले जाया जाएगा, यह मॉडल कोऑपरेटिव के ड्राइवरों को डिजिटल इकॉनमी में हिस्सा लेने लायक बनाएगा। डेटा या पूंजी के नियंत्रण से अलग यह मॉडल सेवा की गुणवत्ता के आधार पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।

सहकारिता मंत्रालय की भूमिका : अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय ने आधुनिक डिजिटल प्लेटफार्म में सहकारिता के सिद्धांत को शामिल करने में अहम भूमिका निभाई है। यह पहल सहकारिता को 21वीं सदी के डिजिटल ढांचे में लाती है।

राष्ट्रीय प्रभाव : भारत टैक्सी रोजगार, मोबिलिटी, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है। यह एक जीता-जागता उदाहरण है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे देश के हित में काम कर सकता है। जैसे यूपीआई ने भुगतान को बदला, वैसे ही भारत टैक्सी जैसे ओएनडीसी पर आधारित प्लेटफॉर्म सेवा और ई-कॉमर्स को बदल देंगे। हमें यह समझना होगा कि भारत टैक्सी सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म नहीं है, यह आर्थिक निष्पक्षता के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन है। यह पहल एक मजबूत, आत्मनिर्भर और बराबरी वाले भारत की भावना को दिखाती है।-डा. अश्वनी महाजन

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