Multibagger Stock: शेयर बाजार में लबे समय तक टिके रहना और मुनाफा कमाते रहना कोई आसान काम नहीं है. इस काम में मल्टीबैगर स्टॉक्स काफी मददगार साबित होते हैं. मल्टीबैगर स्टॉक्स आमतौर पर बाजार के उतार-चढ़ाव से परे होते हैं. ये अपने निवेशकों का खूब मुनाफा कराते हैं. आज हम आपको इस खबर के जरिए एक ऐसे ही स्टॉक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपने निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न देकर मालामाल कर दिया है.
लगातार चढ़ता जा रहा यह मल्टीबैगर स्टॉक
यहां मल्टीबैगर SME स्टॉक कैप्टन पॉलीप्लास्ट (Captain Polyplast) की बात की जा रही है. सोमवार, 9 फरवरी को कंपनी ने शेयरों ने लगभग 8 परसेंट तक की बढ़त हासिल की. कंपनी के शेयरों में आई इस तेजी के पीछे कारोबारी साल 2026 की दिसंबर तिमाही में इसका शानदार प्रदर्शन है. इसके चलते निवेशकों का स्टॉक पर भरोसा बढ़ा और यह 7.7 परसेंट तक उछलकर दिन के अपने सबसे हाई लेवल 83.21 रुपये पर पहुंच गया.
हालांकि, यह अभी भी फरवरी 2025 में पहुंचे अपने 52-हफ्ते के सबसे हाई लेवल 107.70 रुपये से लगभग 23 परसेंट दूर है. कैप्टन पॉलीप्लास्ट के शेयरों का 52-हफ्ते का लो लेवल 58.41 रुपये है, जिसे इसने सितंबर 2025 को छुआ था. पिछले एक साल में भले ही शेयरों में 25 परसेंट की गिरावट आई है, लेकिन बीते एक महीने में इसने 5 परसेंट की बढ़त भी हासिल की है. लॉन्ग टर्म में इस शेयर ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है, जो पिछले 12 सालों में 1450 परसेंट है.
FY26 Q3 में कैसा रहा नतीजा?
कैप्टन पॉलीप्लास्ट ने दिसंबर तिमाही में शानदार परफॉर्मेंस दी. इस दौरान इसका नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के 9.05 करोड़ से 40.07 परसेंट उछलकर 12.66 करोड़ हो गया. वहीं, ऑपरेश्नल रेवेन्यू भी पिछले साल के मुकाबले 40.87 परसेंट बढ़कर 126.33 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह 90.25 करोड़ रुपये था.
FY26 की दूसरी तिमाही में कैप्टन पॉलीप्लास्ट का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 1.82 करोड़ रुपये रहा, जो तीसरी तिमाही में 592.46 परसेंट बढ़कर 12.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. रेवेन्यू भी इस दौरान 58.46 परसेंट की बढ़त के साथ 79.73 करोड़ से 126.33 करोड़ हो गया, जो वॉल्यूम और एग्जिक्यूशन दोनों में तेज बढ़ोतरी को दिखाता है. ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी मजबूत रही. तिमाही के लिए EBITDA सालाना 35 परसेंट बढ़कर 16.13 करोड़ हो गया. हालांकि, EBITDA मार्जिन में 46 बेसिस पॉइंट्स की मामूली कमी देखी गई, जो दिसंबर तिमाही में 12.68 पर आ गया. इसका मुख्य कारण ऑपरेशन के बढ़ते पैमाने के साथ-साथ लागत ज्यादा बढ़ना रहा.

