मुंबई, आरबीआई ने छोटे कारोबारियों और एमएसएमई के लिए कोलेटरल फ्री लोन की लिमिट 10 लाख रूपए का दी हैं। यानी माइक्रों और स्मॉल एंटरप्राइजेज को बिना किसी गांरटी या संपत्ति गिरवी रखे 20 लाख रूपए तक का लोन मिल सकता हैं, ताकि छोटे बिजनेस वाले बिना टेंशन के पैसा ले सकें। आरबीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर किसी एमएसई का अच्छा ट्रैक रेकॉर्ड हैं और फाईनेशियल स्थिति मजबूत है तो बैंक अपनी आंतरिक पॉलिसी के तहत कोलेटरल फ्री लोन की लिमिट को 25 लाख रूपए तक बढ़ा सकते हैं। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
क्या हैं आरबीआई का ओदश
यह नियम न केवल सामान्य एमएसई इकाइयों पर लागू होगा, बल्कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वित्तपोषित इकाइयों को भी इसका लाभ मिलेगा। आरबीआई के सर्कुलर में बैंकों को सलाह दी गई है कि वे खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की ओर से प्रशासित पीएमईजापी के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी इसका लाभ मिलेगा। आरबीआई के सर्कुर में बैंको को सलाह दी गई है कि वे खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ओर से प्रशासित पीएमईजीपी के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी 20 लाख रूपए तक का बिना गांरटी वाला लोन प्रदान करें। क्रेडिट गांरटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल इंटरप्राइजेज लोन लेने वाले उद्यमियों की गांरटी लेगा। इससे क्रेडिट की सुविधा दूरदराज स्थित छोटे उद्यमियों तक पहुंचेगी।
स्वयं की संपत्ति गिरवी रखना वैकल्पिक
संशोधित निर्देशों मे यह भी उल्लेख किया गया हैं कि यदि कोई उद्यमी अपनी मर्जी से सोना-चांदी या अन्य संपत्ति गिरवी रखता है तो इसे नियमों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाएगा। यानी उद्यमी चाहे तो अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रख सकता हैं. लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना हैं कि इस कदम से छोटे और मध्यम व्यवसायों को वित्तीय सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी। गांरटी की बाधा हटने से बैंकिंग प्रणाली में एमएसएमई क्रेडिट गांरटी योजना का भी फायदा उठा सकेंगे।

