महाशिवरात्रि का पर्व चेतना का उत्सव है। इस शुभ अनुष्ठान से हम अपनी परंपराओं को गहराई से समझने का एक अनूठा अवसर पाते हैं। शिव, जो सृष्टि के मूल में स्थिर चेतना हैं, हमें पंच तत्वों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की पूर्ण समझ की ओर ले जाते हैं। इन तत्वों की 360 डिग्री एकीकृत समझ, यानी हर तत्व के साथ पूरी तरह जुडऩा, हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि की ओर ले जाती है।

शिव को समझना वास्तव में चेतना के सबसे गहन स्वरूप को समझना है। शिव कोई केवल देव या मूर्ति नहीं, बल्कि वे असीम शून्यता हैं, जिनसे सृष्टि जन्म लेती है। वे कालातीत हैं, नाद से परे मौन हैं और रूप से परे निराकार हैं। शिव को ‘आदि योगी’ कहा जाता है, क्योंकि वे योग की जड़ हैं-वह प्रक्रिया, जो हमें स्वयं से जोड़ती है। उनका अर्धनारीश्वर रूप हमें स्त्री-पुरुष ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक देता है और उनका तांडव सृजन, पालन और संहार का अनवरत चक्र दिखाता है।  शिवरात्रि पर, इन तत्वों को साधने के लिए आप अपने जीवन में छोटे-छोटे कदम जोड़ सकते हैं। पृथ्वी के लिए ग्राऊंडिंग अभ्यास, जल के लिए भावनात्मक प्रवाह, अग्नि के लिए ऊर्जा संतुलन, वायु के लिए प्राणायाम और आकाश के लिए ध्यान। जब हम इन पांचों को एक चक्र में संतुलित करते हैं, तब हम भीतर एक अखंडता पाते हैं।

शोर से भरी आज की तेज दुनिया निरंतर तुलना से संचालित है। ऐसे समय में शिव का संदेश हमें एक नई दिशा देता है। शिव हमें सिखाते हैं कि तांडव के बीच भी ध्यान संभव है। शोर के बीच मौन और गति के बीच भी स्थिरता संभव है। यदि पंचतत्व संतुलित हैं तो पृथ्वी हमें ‘ग्राउंडेड’ रखती है, जल हमें ‘कम्पैशनेट’ बनाता है, अग्नि ‘पर्पजफुल’ बनाती है, वायु ‘फलैक्सिबल’ और आकाश हमें ‘एक्सपैंसिव’ बनाता है। 

शिव (ज्ञान), शक्ति का संतुलन : न्यूरोसाइंस और क्वांटम फिजिक्स ने दिखाया है कि ध्यान (मैडिटेशन) मस्तिष्क की संरचना को सकारात्मक रूप से बदल सकता है। ध्यान करते समय हम अपने न्यूरल नैटवर्क को पुनर्संरचित करते हैं, जैसे हम आॢटफिशयल इंटैलीजैंस (ए.आई.) एल्गोरिदम सीखते हैं। ए.आई. डाटा से सीखती है, मनुष्य अनुभव से। ए.आई. पैटर्न पहचानती है, जबकि साधक आत्मचिंतन से अपने भीतर के पैटर्न पहचानता है।

यही वह क्षण है जहां ‘शिव’ का मार्गदर्शन प्रासंगिक हो जाता है। शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक है, वह दृष्टि, जो सतही सूचना से परे सत्य को देखती है। ए.आई. हमें सूचना दे सकती है, पर विवेक नहीं। ए.आई. निर्णय सुझा सकती है, पर मूल्य नहीं। ए.आई. सृजन कर सकती है, पर करुणा नहीं। आज की युवा पीढ़ी अगर ए.आई. से प्रतिस्पर्धा करने की बजाय उसे साधन माने और अपनी चेतना, अंतर-बुद्धि को विकसित करे, तो वही वास्तविक ‘शिवत्व’ की ओर बढऩा होगा। भारतीय दर्शन में शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि ज्ञान और शक्ति के समन्वय का जीवंत प्रतीक हैं। उनका तीसरा नेत्र विवेक और जागरूकता का संकेत है, जो हमें याद दिलाता है कि सतही सूचना के पार भी एक गहरी दृष्टि होती है। यदि युवा ए.आई. को साधन के रूप में अपनाकर अपनी अंतर्दृष्टि को विकसित करें, तो वे तकनीक के उपभोक्ता नहीं, उसके सृजनकत्र्ता बनेंगे।

शिव का त्रिशूल शक्ति और संतुलन का प्रतीक है। आज का युवा ज्ञान से संपन्न है, सूचनाओं की कमी नहीं। इंटरनैट और ए.आई. ने ज्ञान तक पहुंच आसान कर दी है। पर केवल जानकारी पर्याप्त नहीं, उसे दिशा देने वाली शक्ति, आंतरिक अनुशासन, धैर्य और नैतिक विवेक भी जरूरी है। ज्ञान (बुद्धि) और शक्ति (संकल्प) का संतुलन ही सृजनात्मक ऊर्जा को जन्म देता है और यही शिव का संदेश है। 

सदैव सार्थक शिव की शिक्षा : शिव का तांडव उग्रता नहीं, लयबद्धता है। यह याद दिलाता है कि सृजन और संहार एक ही चक्र के दो हिस्से हैं। असफलता अंत नहीं, पुनॢनर्माण की शुरुआत है। युवाओं के लिए यह दृष्टिकोण जरूरी है कि जीवन रेखीय दौड़ नहीं, बल्कि चक्रीय प्रक्रिया है। उतार-चढ़ाव ही विकास का हिस्सा हैं। कैलाश-वासी, गंगा-धारी, नाग-भूषण शिव प्रकृति के देवता हैं। उनका स्वरूप हमें प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश देता है। आज जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट विश्व के सामने चुनौती बन चुके हैं, तब शिव का यह रूप हमें संतुलित जीवनशैली की प्रेरणा देता है। शिवरात्रि पर ‘वननैस’ का भी महत्व है। वननैस का अर्थ है-सभी भेदों से परे, एकता का अनुभव। शिव की उपासना हमें यह सिखाती है कि हम सब एक ही चेतना के अंग हैं। जब हम पंच तत्वों में संतुलन लाते हैं, तब वननैस की अनुभूति सहज हो जाती है। आइए इस शिवरात्रि अपने भीतर इस पूर्णता का आलिंगन कर अपनी चेतना को व्यापक बनाएं।-संगीता मित्तल 

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
Exit mobile version