रायपुर, छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव को लेकर अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रभूषण वर्मा ने दोनों ही राष्ट्रीय दल बीजेपी और कांंग्रेस से कम से कम 1 सीट समाज को देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुर्मी समाज की जनसंख्या काफी प्रभावशाली है तथा समाज का राज्य के विकास और राजनीति में बड़ा योगदान रहा है, इसलिए उन्हें उच्च सदन (राज्यसभा) में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। श्री वर्मा ने कहा कि कुर्मी समाज पारंपरिक रूप से छत्तीसगढ़ की राजनीति में अह्म भूमिका निभाता रहा है। समाज की नाराजगी या समर्थन चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि राज्यसभा सीटों पर बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। अत: समाज की यह मांग है कि स्थानीय चेहरों को मौका दिया जाए।
गौरतलब हैं कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा सदस्य केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही अप्रैल में होने वाले राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव के लिए सियासी घमासान जारी हैं। राज्यसभा के इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के पाले में एक-एक सीट जाना तय हैं। कांंग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा जोरो पर हैं। इस नाम ने बाहरी बनाम स्थानीय के पुराने जिन्न को बाहर निकाल दिया हैं। केटीएस तुलसी के बाद एक और बाहरी चेहरे पर कार्यकर्ताओं के तेवर कड़े हैं। वहीं, भाजपा में विधानसभा चुनाव हार चुके कुछ नेता सदन के रास्ते वापसी की जुगल में हैं। दिल्ली दरबार स्थानीय निष्ठा को तवज्जो देगा या फिर रणनीतिक चेहरों को, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की खाली हो रही दो सीटों ने फागुन की आहट से पहले ही राजनीतिक पारा चढ़ा दिया हैं। फूलों देवी नेताम और वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही प्रदेश में नए समीकरणों की बिसात बिछने लगी हैं, लेकिन असली घमासान उम्मीदवारों के चयन को लेकर मचा हैं।
भाजपा में घर वापसी की आस : वहीं, सत्ताधारी दल भाजपा में नजारा अलग हैं। विधासभा चुनाव में हार का सामना करने वाले कई दिग्गज अब राज्यसभा के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में आने की जुगत में हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार किसी स्थानीय चेहरे और संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ता पर दांव लगा सकती हैं।

