कभी-कभी हम घर की सजावट में ऐसी छोटी चीज़ें जोड़ देते हैं, जिनका असर सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मन और माहौल तक पहुँच जाता है. आपने भी कई घरों में शोपीस के रूप में ऊंट की मूर्ति देखी होगी. पर क्या आप जानते हैं कि वास्तु और फेंगशुई के अनुसार इसे सही दिशा में रखा जाए तो यह करियर, व्यापार और किस्मत पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है? यही वजह है कि आजकल लोग सजावट से ज्यादा “ऊर्जा संतुलन” को महत्व दे रहे हैं. अगर आप भी घर में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो ऊंट की मूर्ति से जुड़े इन नियमों को जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
घर में ऊंट की मूर्ति रखने की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार ऊंट को धैर्य, स्थिरता और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना गया है. कहा जाता है कि जिस तरह ऊंट रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ता रहता है, उसी तरह यह मूर्ति जीवन की बाधाओं को पार करने की प्रेरणा देती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंट की मूर्ति को घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना सबसे शुभ माना गया है. यह दिशा सहयोग और सामाजिक संबंधों से जुड़ी मानी जाती है. यदि यह संभव न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी इसे रखा जा सकता है. सही दिशा में रखी गई मूर्ति घर के वातावरण में स्थिरता और सकारात्मकता लाने में मदद करती है.
किस स्थान पर रखें ऊंट की मूर्ति?
सिर्फ दिशा ही नहीं, सही स्थान भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ऊंट की मूर्ति को लिविंग रूम या ड्राइंग रूम में रखना शुभ माना जाता है. यही वह जगह होती है जहाँ परिवार के सदस्य और मेहमान सबसे अधिक समय बिताते हैं. उदाहरण के तौर पर, कई लोग बताते हैं कि जब उन्होंने ड्राइंग रूम में वास्तु अनुसार शोपीस सजाए, तो घर का माहौल पहले से ज्यादा सुकून भरा महसूस होने लगा. ऊंट की मूर्ति भी इसी श्रेणी में आती है, जो स्थिर ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है
ऊंट की मूर्ति रखने के जरूरी नियम
1. जोड़े में रखना शुभ
वास्तु मान्यता के अनुसार ऊंट की मूर्ति को जोड़े में रखना अधिक लाभकारी होता है. इससे व्यापार और करियर में सहयोग और संतुलन बढ़ने की संभावना मानी जाती है.
(अस्वीकरण;यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

