नई दिल्ली. बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार ने एक बार फिर सिर्फ मनोरंजन से हटकर एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को उठाया है. अक्षय कुमार ने हाल ही में सोनी टीवी के गेम शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ के एक एपिसोड में नॉर्थईस्ट भारत के लोगों के खिलाफ होने वाले भेदभाव और नस्लवाद पर खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने जोर देकर कहा कि नॉर्थईस्ट के निवासी उतने ही भारतीय हैं जितने वे खुद या कोई अन्य भारतीय है. इस एपिसोड में एक कंटेस्टेंट ने अपनी कहानी शेयर की, जिसने अक्षय को प्रभावित किया और उन्हें इस मुद्दे पर बोलने के लिए प्रेरित किया.
एपिसोड के दौरान, नॉर्थईस्ट से आई एक महिला कंटेस्टेंट ने मुंबई में अपने साथ हुए नस्लीय भेदभाव की घटनाओं का जिक्र किया. उसने बताया कि उसके चेहरे की बनावट की वजह से लोग उसे ‘चाइना जाओ’ कहकर चिढ़ाते थे और कोविड-19 महामारी के दौरान उसे वायरस फैलाने का दोषी ठहराते थे. यह सुनकर अक्षय हैरान और निराश हो गए. उन्होंने तुरंत अपने मणिपुर निवासी मेकअप आर्टिस्ट किम को स्टेज पर बुलाया और दर्शकों से उनका परिचय कराया. किम ने अपनी जिंदगी की कड़वी सच्चाइयां बताईं कि कैसे लोग उन्हें ‘चाइनीज’, ‘चिंकी’ या ‘मोमो’ जैसे अपमानजनक शब्दों से पुकारते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे मणिपुर से हैं.
‘वे उतने ही भारतीय हैं जितने मैं और आप हैं’
अक्षय ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘किम की बातें सुनकर मुझे यकीन हो गया कि ऐसी घटनाएं वाकई होती हैं. मैं पूरे भारत के लोगों से कहना चाहता हूं कि नॉर्थईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव होता है. वे सब भारतीय हैं. वे उतने ही भारतीय हैं जितने मैं हूं, आप हैं या यहां बैठे लोग हैं.’ इतना ही नहीं उन्होंने नॉर्थईस्ट के लोगों के योगदान के बारे में लोगों को बताया और कहा, ‘इस देश के लिए उनका कितना बड़ा योगदान है. नागा रेजिमेंट… कारगिल युद्ध, बांग्लादेश युद्ध. उन्होंने अपना खून बहाया है. वे भारतीय हैं, यह याद रखें.’ इस संदेश ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया और सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हुई. अक्षय ने जोर दिया कि एकता सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी दिखनी चाहिए. कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि नॉर्थईस्ट के लोग देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे भेदभाव का शिकार होते हैं, जहां उनकी शक्ल-सूरत को आधार बनाकर उन्हें विदेशी समझा जाता है.

