नई दिल्ली/तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचे। भारत की महाताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी के साथ पीएम मोदी का बेन गुरियन एयरपोर्ट पर स्वागत किया। इसे ऐतिहासिक दौरा बताया जा रहा है।

यह तब हुआ है, जब अमेरिका ने एक दिन पहले ही यानी मंगलवार को दुनिया के सबसे एडवांस लड़ाकू विमानों में गिने जाने वाले 12 अमेरिकी F-22 लड़ाकू जेट मंगलवार को इजरायल में उतारे। ईरान से तनाव के बीच अमेरिका ने इजरायली एयरबेस पर इन स्टील्थ जंगी जेट्स की तैनाती की है।

माना जा रहा है कि 25 और 26 फरवरी के इस दो दिवसीय दौरे से इजरायल में भारत की महाताकत दिखनी तय है। हालांकि, इस दौरे से पहले ही पाकिस्तान के पेट में दर्द उठना शुरू हो गया है। उसकी छटपटाहट ऐसी बढ़ी कि उसने आनन-फानन में सीनेट में भारत की तरफ बाहें फैलाए इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव तक पारित कर दिया।

इजरायली एयरपोर्ट पर उतरते ही दोस्ती का दम

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तेल अवीव के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के साथ ही भारत और इजरायल अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इसका श्रेय प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारतीय प्रधानमंत्री के साथ उनकी घनिष्ठ मित्रता को जाता है। डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी भी यही मानते हैं, तभी तो नेतन्याहू खुद पीएम मोदी के स्वागत के लिए पहुंचे।

भारत को मिलेगी इजरायली रक्षा तकनीक

  • पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष एक सुरक्षा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जिसके तहत भारतीय और इजरायली रक्षा उद्योग तकनीक शेयर करने को पूरी तरह से गोपनीय रखेंगे।
  • दोनों देश भारत में संयुक्त रूप से हथियार प्रणालियों का विकास करेंगे। दोनों पक्ष वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक सहयोग को गहरा करके अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
  • इस दौरे में 10 बिलियन डॉलर की बड़ी रक्षा डील संभव है। खास तौर पर आयरन डोम सुरक्षा कवच देने को लेकर इजरायल से डील हो सकती है।
  • भारत इजरायल के बीच बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड, लेजर हथियार, ड्रोन और लंबी दूरी की स्टैंड-ऑफ मिसाइलों को लेकर डील हो सकती है। वहीं, डेविड्स स्लिंग और एरो जैसे एडवांस सिस्टम पर भी सहयोग बढ़ सकता है।

पीएम नरेंद्र मोदी के इस दौरे की टाइमिंग बेहद खास है। एक तरफ ईरान और अमेरिका में युद्ध टालने के लिए बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारतीय पीएम का जोर-शोर से स्वागत ये बताता है कि खाड़ी और मध्य-पूर्व में भारत की भूमिका काफी बड़ी हो गई है। भारत अपने दोस्तों का दायरा बढ़ा रहा है और साथ ही साथ अपना दम भी दिखा रहा है।

भारत-इजरायल और यूएई खाड़ी में मजबूत दोस्त

  • डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, भारत-इजरायल के रिश्ते का सबसे अहम पहलू दोनों नेताओं और दोनों देशों के बीच का आपसी भरोसा है। यही बात खाड़ी क्षेत्र में भारत के एक और सहयोगी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी लागू होती है। भारत के इन दोनों प्रमुख सहयोगियों ने आपस में अच्छे संबंध बना लिए हैं।
  • तीनों साझेदार आतंकवाद के मुद्दे पर एकमत हैं और धर्म को राजनीतिक हथियार बनाकर जनता को कट्टरपंथ से दूर करने में दृढ़ विश्वास रखते हैं। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से मध्य पूर्व में हमेशा तनाव बना हुआ है, जिसका कारण राजनीतिक इस्लाम और क्षेत्रीय शक्तियों द्वारा आतंकी संगठनों का इस्तेमाल है।

भारत-इजरायल और यूएई बनाएंगे नया सिल्क रूट?

  • कई मामलों में समानता रखने वाले भारत और इजरायल कई मुद्दों पर एकमत हैं और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे (21वीं सदी का नया सिल्क रोड) के प्रबल समर्थक हैं।
  • इससे चीन को भी मिर्ची लग सकती है, जो बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के तहत पूरे मध्य एशिया तक अपना जाल फैलाना चाहता है।
  • अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर होने के समय इजरायल की अपनी दूसरी यात्रा करके प्रधानमंत्री मोदी दुनिया को एक संदेश दे रहे हैं। भारत हमेशा अपने मित्रों के साथ खड़ा रहता है।

पाकिस्तान के पेट में उठ गया दर्द

  • न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र ने पीएम मोदी के इजरायल दौरे का अप्रत्याशित रूप से कड़ा विरोध जताया है। पाकिस्तान की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत और अन्य देशों के साथ क्षेत्रीय गठबंधन बनाने संबंधी टिप्पणियों की निंदा की।
  • वहीं, पाकिस्तानी सांसदों ने इसे मुस्लिम राष्ट्रों के खिलाफ बताया। इस प्रस्ताव में प्रस्तावित गठबंधन को क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया गया और इजरायल पर मुस्लिम बहुल राज्यों को अलग-थलग करने के उद्देश्य से गुट बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया।

F-22 रैप्टर की इजरायल में तैनाती बेहद असामान्य

  • वाईनेट ग्लोबल पर छपी एक खबर के अनुसार, F-22 रैप्टर अमेरिकी शस्त्रागार में मौजूद दो पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में से एक है।
  • दूसरा विमान F-35 है, जिसका संचालन इजरायली वायु सेना भी करती है। इजरायल में अमेरिकी लड़ाकू विमानों का उतरना असामान्य है। ऐसे में उन्नत स्टील्थ F-22 की तैनाती तो और भी अधिक महत्वपूर्ण है।

F-22 को किसी विदेशी सेना को नहीं बेचा गया

  • F-22 ने पहली बार 1990 में उड़ान भरी थी। यह मुख्य रूप से हवाई श्रेष्ठता हासिल करने वाला लड़ाकू विमान है। हालांकि, यह जमीनी हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और खुफिया मिशनों में भी सक्षम है।
  • F-35 के विपरीत अमेरिकी कानूनी प्रतिबंध के कारण F-22 को किसी भी विदेशी सेनाओं को नहीं बेचा गया है।

इस्लामिक स्टेट को कर दिया था तबाह

  • F-22 विमान का पहला ऑपरेशनल मिशन 2014 में हुआ था, जब इसने खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर हमला किया था।
  • इसे पहली बार 2023 में मार गिराया गया, जब इसने अटलांटिक महासागर के ऊपर एक चीनी निगरानी गुब्बारे को नष्ट कर दिया। इसने अभी तक किसी मानवयुक्त विमान को नहीं गिराया है।
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