शिलांग: शिलांग के असम रेजिमेंटल सेंटर में शॉर्ट-टर्म अग्निपथ स्कीम के तहत ट्रेनिंग ले रहे दो ट्रेनी अग्निवीर सैनिकों की संदिग्ध मेनिंगोकोकल बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण मौत हो गई है। वहीं, दूसरे 28 ट्रेनी को ऑब्जर्वेशन के लिए शिलांग के मिलिट्री अस्पातल में रखा गया है, जहां उनकी हालत अभी स्थिर है। इस इन्फेक्शन के कारण एक ट्रेनी की पिछले हफ्ते और दूसरे की सोमवार को मौत हो गई थी। इन दोनों अग्निवीर सैनिकों में संदिग्ध मेनिंगोकोकल इन्फेक्शन जैसे लक्षण दिखे थे।
कैंपस के अंदर मास्किंग और अन्य प्रोटोकॉल लागू
शिलांग में रक्षा मंत्रालय के पब्लिक रिलेशन्स ऑफिस ने बुधवार को एक बयान में कहा कि एहतियात और रोकथाम के उपाय तुरंत लागू कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर सभी पहचाने गए कॉन्टैक्ट्स को एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सासिन की प्रोफिलैक्टिक डोज दी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि कैंपस के अंदर मास्किंग और आने-जाने पर रोक के प्रोटोकॉल लागू हैं। उन्होंने ये भी कहा कि चिंता या घबराहट की कोई बात नहीं है।
जानें कैसे फैलती है बिमारी
बैक्टीरिया नीसेरिया मेनिंगिटिडिस मेनिंगोकोकल बीमारी का कारण बनता है। यह मेनिनजाइटिस, दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों का इन्फेक्शन, मेनिंगोकोकल सेप्टिसीमिया (खून में इन्फेक्शन) या दोनों के रूप में हो सकता है। यह बीमारी तेजी से बढ़ सकती है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे मौत की दर बहुत ज्यादा होती है। यह सांस की बूंदों और करीबी संपर्क से फैलता है, खासकर बैरक या हॉस्टल जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर।
‘निपाह वायरस का मैसेज पूरी तरह से झूठा’
अधिकारियों ने स्टैंडर्ड आउटब्रेक रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल के तहत ट्रेनिंग सेंटर के अंदर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, कीमोप्रोफिलैक्सिस, सिम्टम सर्विलांस और बड़ी भीड़ पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस मैसेज को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि एआरसी और गोरखा ट्रेनिंग सेंटर (जीटीसी) में निपाह वायरस का पता चला है। बयान में कहा गया कि एआरसी और जीटीसी में निपाह वायरस का पता चलने वाला मैसेज पूरी तरह से झूठा है। यह फेक है और अफवाह फैलाने का मामला है।
बिना वेरिफाई के जानकारी न फैलाएं
अधिकारियों ने कहा कि स्थिति सिर्फ मेनिंगोकोकल इन्फेक्शन के संदिग्ध मामलों तक ही सीमित है और कंट्रोल में है। मेडिकल टीमें सभी कॉन्टैक्ट्स पर करीब से नजर रख रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सिर्फ ऑफिशियल बयानों पर भरोसा करें और बिना वेरिफाई के जानकारी न फैलाएं, क्योंकि लैब कन्फर्मेशन और आगे की मेडिकल जांच जारी है।

