बेंगलुरु: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जारी चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री 6 मार्च को रिकॉर्ड तोड़ 17वां बजट पेश करेंगे, तब इससे पहले राज्य में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने नेतृत्व परिर्वतन के लिए किसी भी क्रांति की संभावना से इनकार करते हुए कहा है कि सीएम का विषय समय तय करेगा। डीके शिवकुमार जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति के भी प्रमुख हैं। उन्होंने सब्र (इंतजार) और पार्टी के अनुशासन पर जाेर दिया है। डीके शिवकुमार के अनुसार वह कांग्रेस को ब्लैकमेल या नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, और कहा कि उनकी लड़ाई कभी भी पार्टी के अंदर नहीं थी। गौरतलब हो कि पिछले दिनों ऐसी बातें सामने आई थीं कि डीके समर्थक विधायक लामबंद हो रहे हैं।
क्या बजट सत्र के बाद बदलाव?
चर्चा यहां तक है कि कर्नाटक के बजट सत्र के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। कर्नाटक विधानमंडल का बजट सत्र 27 मार्च तक चलेगा। डीके शिवकुमार ने कहा है कि उन्होंने कभी भी लीडरशिप में बदलाव के बारे में पब्लिकली बात नहीं की है और सीएम पद पर कोई भी चर्चा पूरी तरह से उनके, चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया और पार्टी हाईकमान के बीच है। कर्नाटक डिप्टी सीएम ने कहा कि मैंने कभी भी मुख्यमंत्री के मुद्दे पर बात नहीं की है। अगर पद खाली है, तो ही इसे किसी और को दिया जा सकता है। मैंने कभी नहीं कहा कि इसे खाली होना चाहिए। गौरतलब हो कि विपक्ष द्वारा सत्तारूढ़ कांग्रेस के पावर की खींचतान के आरोप लगाए जा रहे हैं। डीके ने फोन टैपिंग के जरिए उनके कैंप पर नजर रखने के लिए स्टेट इंटेलिजेंस का इस्तेमाल को भी खरिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सीएम और गृह मंत्री पहले ही बता चुके हैं।
मैं एक स्ट्रीट फाइटर हूं…
मीडिया से बातचीत में डीके शिवकुमार ने खुद को एक स्ट्रीट फाइटर बताया। उन्होंने कहा कि वह पावर के लिए लड़ने वालों में नहीं हैं। डीके शिवकुमार ने इस बात की पुष्टि की कि वह 10 मार्च को एक डिनर मीट कर रहे हैं। उन्होंने कि केपीसीसी के अध्यक्ष के तौर 6 साल पूरे कर रहे हैं। डीके शिवकुमार ने कहा कि वह चाहते हैं कि नए खून और नए विचारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केपीसीसी चीफ के तौर पर छह साल उनके लिए काफी थे। गौरतलब हो कि कर्नाटक में नेतृत्व परिर्वतन का मुद्दा पिछले छह से आठ महीने से गर्म है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डीके खेमे के विधायकों फोन टैपिंग के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा था कि विपक्षी पार्टियों पर उनके रिश्ते खराब करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने अपने रिश्ते को दूध और शहद जैसा बताया था।

