तिरुवनन्तपुरम: केरल की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक 57 वर्षीय ट्यूशन टीचर को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 18 साल की सजा सुनाई है। 2024 में दर्ज हुए इस मामले में टीचर सुभाष कुमार को POCSO कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाया गया। कोर्ट ने उसे 18 साल की सजा के साथ 35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जज अंजू मीरा बिड़ला ने आदेश दिया कि यदि दोषी जुर्माना नहीं भरता है तो उसे अतिरिक्त 3.5 वर्ष की सजा और भुगतनी होगी। बता दें कि पीड़िता के साथ यौन शोषण की यह घटनाएं साल 2013-14 के दौरान हुई थीं।

उस पांचवी कक्षा में पढ़ती थी छात्रा

जिस समय पीड़िता का ट्यूशन टीचर ने यौन शोषण किया वो पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। पीड़िता दलित समुदाय से है। आरोपी उसे ट्यूशन शिक्षक के रूप में पढ़ाता था। जांच में सामने आया कि बार-बार हुए उत्पीड़न के कारण पीड़िता ने उसकी ट्यूशन जाना बंद कर दिया था। लेकिन डर और मानसिक आघात के कारण वह लंबे समय तक अपने परिवार को इस बारे में नहीं बता सकी। यह मामला जुलाई 2024 में सामने आया। उस समय पीड़िता मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी और डिप्रेशन के कारण मनोचिकित्सा विभाग में इलाज ले रही थी। थेरेपी के दौरान उसने डॉक्टर को आपबीती सुनाई। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर उसने पुलिस से संपर्क किया। ऐसे इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

पीड़िता को आते थे पैनिक अटैक

सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि बचपन में हुए इस अनुभव के कारण उसे तेज पैनिक अटैक आते थे। कॉलेज के दूसरे वर्ष में उसमें अवसाद के लक्षण भी दिखाई देने लगे। एक दोस्त के पिता से बातचीत के दौरान घटना की याद आने पर उसे तेज पैनिक अटैक हुआ। इसके बाद उसने मदद लेने का निर्णय किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी को पीड़ित पक्ष ने उचित तरीके से स्पष्ट किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता की गवाही पर संदेह करने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया।

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