बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार को फिर से शुरू हो गया। राज्य सभा में विदेश मंत्री जयशंकर ने इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर बयान दिया। सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीयों की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार गंभीर है। हम पश्चिम एशिया के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत मानता है कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी भी घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।
भारतीयों की मदद के लिए किए जा रहे प्रयास
सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।
युद्ध को लेकर क्या बोले जयशंकर?
इजरायल और ईरान के युद्ध को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि यह निरंतर संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। स्वाभाविक रूप से पश्चिम एशिया की स्थिरता और शांति बनाए रखना हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं।
मारे गए लोगों के लिए संवेदना की व्यक्त
इस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने युद्ध में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमने जनवरी में ही अपने नागरिकों को आगाह किया था कि जितनी जल्दी हो स्वदेश लौट आएं। भारतीय दूतावास ने भी एडवाइजरी जारी की थी। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति सतर्क है। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
दो भारतीय नाविकों की हुई मौत
एस. जयशंकर ने राज्य सभा में कहा कि हाल ही में हुई घटनाओं में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक नाविक अभी भी लापता है। उन्होंने बताया कि तेहरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने वहां बंधक बनाए गए कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित दूसरे देशों में भेजने में मदद की है। व्यापार के काम से ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते भारत वापस आने में भी सहायता दी गई है। जयशंकर ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह से काम कर रहा है और हाई अलर्ट पर है। सरकार इस समय वहां रह रहे भारतीयों की हर संभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।

