अशोकनगर: 8 मार्च महिला दिवस था। इसी दौरान अशोकनगर जिले में करीला धाम मेले की शुरुआत हुई है। मेले में महिला कर्मियों के हाथ में बहुत सारी चीजों की कमान है। इस दौरान एक मां फर्ज के साथ-साथ शासकीय दायित्व का भी निर्वहन नौ माह की बेटी को गोद में लेकर कर रही थी। वह हर दिन बेटी को गोद में लेकर ड्यूटी करने आती हैं।

करीला धाम मेले की शुरुआत

दरअसल, रंगपंचमी के दिन अशोकनगर में करीला धाम मेले की शुरुआत हुई है। करीला मेले की व्यवस्था को संभालने के लिए 2500 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी यहां लगाई है। जिले में पदस्थ शालिनी भार्गव की ड्यूटी भी यहां लगाई गई है। नौ महीने पहले ही वह मां बनी हैं। ड्यूटी भी जरूरी है। ऐसे में वह अपनी बेटी को गोद में लेकर ड्यूटी आती हैं। शासकीय कार्यों के साथ-साथ शालिनी भार्गव यहां मां होने का भी फर्ज निभाती हैं।

मां के बिना नहीं रह पाती बेटी, इसलिए साथ लाती हैं ड्यूटी पर

शालिनी भार्गव ने बताया कि उनकी बेटी अभी बहुत छोटी है और मां के बिना रह नहीं पाती। लगातार मेले में ड्यूटी होने के कारण उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर दिन मेले में उपस्थित रहना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने अपनी बेटी को भी साथ लाने का फैसला किया। वह सरकारी कामकाज संभालने के साथ-साथ बेटी की देखभाल भी करती हैं, जो मां के स्नेह और कर्तव्य का अनोखा उदाहरण पेश करता है।

मेले में पहली बार बड़ी संख्या में महिलाओं की ड्यूटी

करीला मेले में इस बार पहली बार बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। मंदिर परिसर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं में महिला कर्मी अहम भूमिका निभा रही हैं। यहां तक कि मंदिर के गर्भगृह के बाहर प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था में भी पहली बार महिला कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मां की ममता और कर्तव्य का यह भावुक दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को यह संदेश दे रहा है कि मां हर परिस्थिति में अपने बच्चे और अपने कर्तव्य दोनों का साथ निभाती है।

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