रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष एवं कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट भाषण में पेंशन भुगतान के डिजिटलीकरण संबंधी खुलासे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि पेंशन भुगतान प्रणाली के डिजिटलीकरण के बाद यह तथ्य सामने आया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को मध्यप्रदेश से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होने हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह राशि प्राप्त होने पर राज्य के पेंशन भार में कमी आएगी। नामदेव ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में शब्दों की बाजीगरी के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के संभावित पेंशन घोटाले को छिपाने का प्रयास किया है।

विधानसभा में चुप्पी पर सवाल

महासंघ के अनुसार यह मामला अत्यंत गंभीर है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इतने बड़े वित्तीय मुद्दे पर विधानसभा में पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। नामदेव ने कहा कि यदि यह मामला स्पष्ट रूप से सामने आया है, तो उस पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होना स्वाभाविक था। लेकिन इस विषय पर मौन रहना कई सवाल खड़े करता है।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम का प्रावधान

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के अनुसार पेंशन संबंधी दायित्वों का विभाजन 74% मध्यप्रदेश और 26% छत्तीसगढ़ के अनुपात में किया गया था। प्रावधान के अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार अपने हिस्से की 26 प्रतिशत राशि का वहन करती रही है। महासंघ का आरोप है कि यदि मध्यप्रदेश द्वारा अपने हिस्से की 74 प्रतिशत राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया और वह राशि बढ़ते-बढ़ते लगभग 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।

जवाबदेही तय करने की मांग

महासंघ ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह बकाया राशि कब और किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी हो गई, इसकी निगरानी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए, और इसकी वसूली की ठोस प्रक्रिया क्या होगी। नामदेव ने कहा कि इतने बड़े वित्तीय दायित्व का वर्षों तक संज्ञान में न आना चिंताजनक है और इसके लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

पेंशनरों के अधिकारों से जुड़ा मामल

महासंघ के अनुसार यह केवल दो राज्यों के बीच वित्तीय समन्वय का विषय नहीं है, बल्कि लाखों वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के अधिकारों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। यदि डिजिटलीकरण के माध्यम से यह तथ्य सामने आया है तो यह स्वागतयोग्य है, लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक की वित्तीय निगरानी व्यवस्था में ऐसी कमी क्यों रही.

विधानसभा में चर्चा की मांग

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने सत्तापक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों से आग्रह किया है कि वे इस विषय को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएं और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगें कि—

  • मध्यप्रदेश से बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया क्या होगी ?
  • यह राशि कब तक प्राप्त होने की संभावना है ?
  • भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जाएगी ?

2018 से उठाया जा रहा मुद्दा

महासंघ ने दावा किया है कि संगठन द्वारा वर्ष 2018 से ही इस विषय पर राज्य सरकार को ज्ञापन और पत्राचार के माध्यम से आगाह किया जाता रहा है। हाल ही में वित्त विभाग द्वारा इस प्रकरण की गंभीरता से जांच किए जाने के बाद स्थिति स्पष्ट हुई है।

पारदर्शी जांच की मांग

महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे पी मिश्रा, महामंत्री अनिल गोल्हानी, संगठन मंत्री टी पी सिंह, कोषाध्यक्ष बी एस दसमेर,संभागीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार त्रिवेदी,जिला रायपुर अध्यक्ष आर जी बोहरे सचिव ओ डी शर्मा तथा विधि सलाहकार एडवोकेट पूरन सिंह पटेल,ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच, जिम्मेदारी तय करने तथा पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए सुदृढ़ और पारदर्शी तंत्र स्थापित करने की मांग की है।

अंततः महासंघ का कहना है कि यह केवल वित्तीय समायोजन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों वरिष्ठ नागरिकों के विश्वास और अधिकारों से जुड़ा मामला है। जनहित में सरकार को इस पर स्पष्ट, समयबद्ध और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

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