बेंगलुरु : कर्नाटक सरकार ने मैसूर सिल्क साड़ियों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। ऐसा भारी मांग के कारण शुद्ध शहतूत रेशम, सोने की जरी और चांदी के धागों से बनी जीआई-टैग वाली इन साड़ियों की आपूर्ति कम पड़ गई है। सरकारी स्वामित्व वाली कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (केएसआईसी) अपने विशेष आउटलेट्स पर आने वाले खरीदारों को सीमित स्टॉक में साड़ियां प्राथमिकता के आधार पर देगी।
रेशम उत्पादन मंत्री के. वेंकटेश ने विधानसभा में यह घोषणा करते हुए साड़ियों की उच्च गुणवत्ता को मांग में इस उछाल का कारण बताया। उन्होंने कहा कि उत्पादन स्थिर होने के बाद ऑनलाइन बिक्री फिर से शुरू हो जाएगी।
रोज होता है 300-400 साड़ियों का उत्पादन
केएसआईसी ने राज्य के बाहर के ग्राहकों के लिए साड़ियों को सुलभ बनाने के लिए ऑनलाइन बिक्री शुरू की थी। यह कंपनी 1912 से इस प्रसिद्ध बुनाई का उत्पादन कर रही है। अभी प्रतिदिन 300-400 मैसूर सिल्क साड़ियों का उत्पादन होता है। पिछले तीन वर्षों में इसका कुल उत्पादन 31 लाख साड़ियों का रहा है।
हर साल लगती है साड़ियों की सेल
वेंकटेश ने बताया कि विशेष छूट वाली सेल के दौरान साड़ियों की लोकप्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि चूंकि डिफेक्टिव साड़ियां बिना बिके रह जाती हैं, इसलिए हम 25% से 50% तक की छूट देते हैं। इन विशेष सेल के दौरान लोग सुबह 3 बजे से ही कतार में लग जाते हैं।
कहां से आता है कोकून
केएसआईसी मुख्य रूप से राज्य के सिदलाघट्टा, रामनगर और कोललेगल स्थित सरकारी बाजारों से प्रीमियम कोकून प्राप्त करता है। वेंकटेश ने कहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और अन्य राज्यों से उच्च गुणवत्ता वाले कोकून प्राप्त करने में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। हालांकि गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
KSIC का बढ़ रहा प्रॉफिट
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने 30 ई-जैक्वार्ड लूम स्थापित किए हैं, जिससे उत्पादन में प्रति माह लगभग 7,500 मीटर की वृद्धि हुई है। केएसआईसी की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। लाभ 2023-24 में 73 करोड़ रुपये और 2022-23 में 46 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 101 करोड़ रुपये हो गया है।

