रायपुर। छतीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढिय़ों का राज होने की बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई बार कई मंच से बोल चुके है। विगत 6 दिसंबर को पाटन राज के कुर्मी समाज के अधिवेशन में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 15 सालों के बाद लोगों को लगने लगा है कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढिय़ों का राज आया है। लेकिन बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि इसी छत्तीसगढिय़ा राज में एक छत्तीसगढिय़ा के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण का समाधान बरसों बाद भी नहीं हो पाया है। मामला जल संसाधन विभाग का है। जल संसाधन विभाग के इस अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पुत्री कुमारी सरिता वर्मा द्वारा अपने पिता की शासकीय सेवा में रहते हुए दिनांक 15 दिसंबर 1996 को आकस्मिक अवसान के तत्काल बाद वर्ष 1997 को संर्पूण प्रक्रिया का पालन करते हुए विभाग को आवेदन कर दिया गया था। दुर्भाग्य से आवेदिका ग्रस्त होकर बहुत ही दुखी संतप्त हृदय से आवेदन छत्त्तीसगढिय़ा शेर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। श्री बघेल को प्रस्तुत आवेदन में आवेदिका सरिता वर्मा ने कहा है कि जल संसाधन विभाग के अनुकंपा नियुक्ति के इस सीधे सहज प्रकरण को जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, प्रमुख अभियंता, कलेक्टर बिलासपुर के द्वारा उनके कार्यालयीन स्टाफ के द्वारा निर्ममतापूर्वक निष्क्रय होकर गैर जिम्मेदाराना हरकत का स्पष्ट रूख अपनाते हुए वर्ष 1997 से लेकर दिनांक 17 जनवरी वर्ष 2001 चार वर्षों तक चुपचाप बैठक कर अत्यंत मूल्यवान समय खराब किया गया है। इसी बीच 1 नवंबर 2000 में मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य (नया प्रदेश का गठन हो गया) नियम कानून बदले गये। आवेदिका सरिता वर्मा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से प्रार्थना की है कि कैबिनेट की मंजूरी दिलाकर आवेदिका को सहज नैसर्गिक न्याय प्रदान करने हेतु समय शिथिलिकरण की अनुमति दिलाने की कृपा करें ताकि अनुकंपा नियुक्ति आदेश प्रदान हो सके।
प्रकरण का स्वरूप
1 15 दिसंबर 1996 निधन
2 …..1997 आवेदन
3 4 वर्ष बाद प्रक्रिया में लाया गया। (तब मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ बन गया)
4 17 फरवरी 2001 को प्रकरण विभाग (प्रमुख अभियंता) द्वारा आपत्ति लगा कि सहायक वर्ग 3 का पद रिक्त नहीं है। प्रकरण कलेक्टर बिलासपुर को प्रकरण वापस भेजा गया।
5 22 मई 2001 को कलेक्टर ने विभाग के मुख्य अभियंता को पुन: वापस लेख दिया कि 1 नवंबर 2000 से नये राज्य गठन के फलस्वरूप समस्त कार्यालयों के रिक्त पद समाप्त कर दिये गये है।
6 वर्ष 2007 में जल संसाधन का सेटअप स्वीकार हुआ।
मुख्य अभियंता बिलासपुर एवं कलेक्टर बिलासपुर ने वर्ष 1997 से वर्ष 2001 के बीच पूर्ण रूप से तटस्थ निष्क्रिय रहकर प्रकरण में विलंब किया है। क्रमश…
जल संसाधन विभाग अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण: यह कैसा छत्तीसगढिय़ा राज…?, छत्तीसगढिय़ा शेर के राज में एक छत्तीसगढिय़ा से हो रहा अन्याय…
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