Movie Dhurandhar 2: सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर-2 ने बॉक्स ऑफिस पर आते ही खलबली मचा दी है। निर्देशक आदित्य धर की इस फिल्म में अपराध और राजनीति का वो खूनी मेल दिखाया गया है, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश की सत्ता को हिला कर रखा था। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा फिल्म के विलेन आतिफ अहमद की हो रही है, जिसका किरदार हूबहू यूपी के कुख्यात माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद की याद दिलाता है।
तांगेवाले के बेटे से जुर्म के शहंशाह तक का सफर
फिल्म में आतिफ का बैकग्राउंड अतीक अहमद की असल जिंदगी से मेल खाता है। अतीक, जिसका जन्म 1962 में प्रयागराज के एक साधारण परिवार में हुआ था और जिसके पिता तांगा चलाते थे, उसने 17 साल की उम्र में ही जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया था। अतीक ने अपना गैंग बनाया और देखते ही देखते उस पर हत्या, अपहरण और रंगदारी के 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो गए। 1989 में निर्दलीय विधायक बनकर अतीक ने सबको चौंका दिया। वह 5 बार विधायक और एक बार फूलपुर से सांसद रहा।
फिल्म बनाम हकीकत: जेल से चलता था सिस्टम
धुरंधर-2 में एक डायलॉग काफी वायरल हो रहा है कि जब तक आतिफ अहमद है, जेल में हो या बाहर, सब संभाल लेगा। हकीकत में भी अतीक अहमद का खौफ ऐसा ही था। उसने देवरिया जेल के भीतर एक कारोबारी का अपहरण करवाकर उसकी पिटाई करवाई थी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे यह माफिया किरदार जेल के अंदर से ही मोबाइल और इंटरनेट के जरिए फेक करेंसी और रंगदारी का ग्लोबल नेटवर्क चलाता है। फिल्म का हीरो हमजा (रणवीर सिंह) इसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के मिशन पर निकलता है।
अतीक का अंत और फिल्म का रोमांचक क्लाइमेक्स
अतीक अहमद के पतन की कहानी 2005 के राजू पाल हत्याकांड से शुरू हुई थी, लेकिन उसका खौफनाक अंत 15 अप्रैल 2023 को हुआ। जब पुलिस कस्टडी में मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय कैमरों के सामने अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। फिल्म धुरंधर-2 में इस अंत को एक नया मोड़ दिया गया है। निर्देशक ने आतिफ के खात्मे को सिर्फ एक गैंगवार नहीं, बल्कि एक बड़े नेशनल सिक्योरिटी मिशन का हिस्सा बताया है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे माफिया का अंडरवर्ल्ड कनेक्शन देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया था।
करोड़ों की संपत्ति और सिस्टम का संदेश
फिल्म में आतिफ अहमद की अकूत बेनामी संपत्ति और उसके राजनीतिक रसूख को दिखाया गया है, जो अतीक अहमद की उन संपत्तियों की याद दिलाता है जिन्हें प्रशासन ने कुर्क किया था।

