राजनांदगांव। बच्चों और महिलाओं को सुपोषित बनाने के लिए जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य कुपोषण को मिटाना है। इसी कड़ी में राजनांदगांव शहरी क्षेत्र के गौरीनगर में महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों और क्षेत्रीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने विशेषकर गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य से संबंधित कई कार्यक्रम किए। इस अवसर पर मौजूद लाभार्थियों को सुपोषण के प्रति प्रेरित करने का प्रयास किया गया। कुपोषण मुक्ति के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से यहां विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से मूंगफली, केला, कुंदरू, कद्दू, अंडे, पपीता, सोया बड़ी, चना, उड़द, अरहर दाल, बटरा, पापड़, प्याज, आलू, मुनगा भाजी, कांदा भाजी, पोई भाजी और मीठा नीम जैसी विभिन्न प्रजातियों को रखा गया। साथ ही महिलाओं को इसके सेवन से होने वाले फायदे भी बताए गए। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को कम वजन के नवजात शिशुओं को कंगारू मदर केयर देने की जानकारी दी। साथ ही संक्रमण से बचाव हेतु साफ सफाई बरतने, मां द्वारा शिशु को कम से कम 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने तथा माता को स्वयं मौसमी फलों, हरी सब्जियों और रेडी-टू-ईट का उपयोग करने हेतु समझाइश दी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका व मितानिन ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा, सही पोषण ही बेहतर विकास की नींव मानी जाती है, इसलिए जो चीजें हमारे आसपास ही मौजूद हैं, उसका भरपूर उपयोग करें। शिशु व स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लाभार्थी महिलाएं सजगता के साथ समय-समय पर जरूरी सलाह लेती रहेंगी तो कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई जीतने में निश्चित तौर पर बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि, बच्चों को कुपोषित होने से बचाना है तो आंगनबाड़ी केन्द्र में होने वाली गतिविधियों से जरूर जुड़ें। आंगनबाड़ी के लाभ को अपनाएं। इसके साथ-साथ रेडी-टू-ईट, हरी सब्जियों, अंडा और खासकर मुनगा जैसी चीजों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और कुपोषण से मुक्ति पाएं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अमृता ठाकुर ने बताया, महिलाओं और शिशुओं में सुपोषण के लिए गोद भराई, उचित पोषण आहार, रेडी-टू-ईट या वजन जांचने जैसे क्रिया-कलाप क्षेत्र में लगातार किए जा रहे हैं और इससे महिलाएं लाभान्वित भी हो रही हैं। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सुपोषण के लिए जिले में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजनांतर्गत इस वर्ष अब तक 9,093 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई एवं 4,281 गंभीर कुपोषित बच्चों को नि:शुल्क दवा वितरण किया गया है। जिले में 6 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें नियमित रूप से बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में माह फरवरी 2020 तक कुल 960 अति गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र का लाभ दिया गया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। उन्होंने बताया, कुपोषण मुक्ति के लिए स्थानीय पौष्टिक आहार को प्रमुखता, बाड़ी, किचन गार्डन को बढ़ावा और अधिक से अधिक जन समुदाय की सहभागिता जैसे कई प्रयास एक साथ और लगातार किए जा रहे हैं। इसके अलावा बच्चे का नियमित टीकाकरण हो, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है और इसी कड़ी में गौरी नगर क्षेत्र में पोषण से संबंधित जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह होता है कंगारू मदर केयर
कंगारू मदर केयर वह तकनीक है, जिसमें बच्चे को मां के सीने से चिपकाकर रखा जाता है, ताकि मां के शरीर की गर्माहट बच्चे के भी शरीर को मिल पाए। मां के शरीर का तापमान बच्चे को मिलने से बच्चे के शरीर का तापमान स्थिर रहता है और उसे ठंडा बुखार होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जन्म के समय जिन बच्चों का वजन 2 किलो या उससे कम होता है, ऐसे बच्चों को जन्म के तुरंत बाद जितना जल्दी हो सके कंगारू मदर केयर दी जानी चाहिए।

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