उसने खुद ही इस संसार से रुखसत हो जाने का निर्णय कर लिया और जहर खाकर आत्महत्या कर ली। जाहिर है सत्ता उन लोगों के हाथ आ गई थी जिनके लिए सत्ता सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी तिजोरियां भरने का माध्यम बन गई है। तिजोरियां भी अहंकार ग्रस्त मानसिकता से सार्वजनिक रूप से डरा धमका कर। इसे एक प्रकार से फिरौती मांगने का नया तरीका कहा जा सकता है। इस बार फिरौती में पिता के नाम पर ठेका मांगा गया था। न मिलने पर हत्या नहीं की गई, बल्कि कहा गया तुम खुद आत्महत्या करो। यह बहुत ही क्रूर और अमानवीय आचरण है। लेकिन इससे जो आगे हुआ, उसने आम आदमी पार्टी को पूरे रूप में नंगा कर दिया। गगनजीत सिंह ने मरने से पहले वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया था जिसमें उसने अपनी आत्महत्या के लिए मंत्री लाल जीत सिंह भुल्लर को जिम्मेवार ठहराया है…

राजनीति कितनी क्रूर और असंवेदनशील हो सकती है, इसका एक ताजा उदाहरण पंजाब में एक मंत्री लाल जीत सिंह भुल्लर के किस्से से जाहिर होता है। भुल्लर जिस विभाग के मंत्री थे, उस विभाग में डा. गगनदीप सिंह रंधावा राज्य गोदाम कारपोरेशन में जिला मैनेजर के पद पर काम करते थे। भारत सरकार का खाद्य निगम अन्न भंडारण के लिए गोदामों का निर्माण करता है। उसके लिए टैंडर निकालने, उसके लिए कमेटियां बनाने और टैंडर अलाट तक करने में जो कमेटियां बनती हैं, उनमें राज्य सरकार का प्रतिनिधि भी मेंबर रहता है। आखिर टैंडर अलाट होने के बाद निर्माण कार्य की देखरेख राज्य सरकार के अभिकरणों को ही करनी होती है, इसलिए राज्य सरकार को पूरी प्रक्रिया से जोड़े रखना जरूरी होता है। डा. गगनदीप सिंह इसी भूमिका में था। अब असली कहानी उसके बाद शुरू होती है। गगनदीप सिंह के परिवार के सदस्यों का आरोप है कि महकमे के मंत्री लाल जीत सिंह भुल्लर पहले दिन से ही इस बात की जिद करने लगे कि जैसे भी हो, टैंडर उसके पिता जी को ही मिलना चाहिए। गगनदीप सिंह ने नियमों का और पूरी प्रक्रिया में अपनी सीमित भूमिका का हवाला दिया। अपने उच्च अधिकारियों को भी बताया। लेकिन किसी ने न सुनना था और जिस प्रकार का माहौल बन चुका था, उसमें शायद किसी में सुनने की हिम्मत भी नहीं बचा थी। ऐसा आरोप है कि लाल जीत सिंह भुल्लर की रुचि नियम प्रक्रिया को समझने में नहीं थी, उसकी एकमात्र रुचि अपने पिता को किसी भी तरीके से ठेका दिलवा देने तक सिमट गई थी। उसको अब मछली की आंख ही दिखाई दे रही थी। जब मामले मछली की आंख तक ही सिमट जाए, फिर नियम कायदे बेकार हो जाते हैं। गगनजीत सिंह भुल्लर नियम कायदे से बाहर जा नहीं सकते थे और न ही यह उसके अधिकार क्षेत्र में था। यह कुछ इसी प्रकार का मामला बनता जा रहा था, जैसे कोई ताकतवर आदमी अपने किसी कर्मचारी को कहे कि किसी पड़ोसी के बाग से उसके आम तोडक़र लाओ और कर्मचारी यह अनाधिकार चेष्टा करने से इंकार कर दे।

उसका कारण भी साफ था। यदि कल वह पड़ोसी के बाग से आम तोड़ता पकड़ा गया तो सजा उसको मिलेगी। उस मालिक को नहीं जिसने उसे धमका कर पड़ोसी के बाग में भेजा था। गगनजीत सिंह के परिवार वालों का कहना है कि मंत्री अपने पिता को ठेका दिलवाने के लिए जिद कर रहा था और गगनदीप सिंह रंधावा यह अनुचित काम करने के लिए तैयार नहीं था। जाहिर है कि सत्ता आदमी को आदमी नहीं रहने देती है। उसका व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता। कहा भी गया है, ‘प्रभुता पाहीं काही मद नाहीं।’ अर्थात कौन ऐसा है जो सत्ता के नशे का शिकार नहीं हो जाता। गगनदीप सिंह के परिवार का आरोप है कि अब यहां तक पहुंचते पहुंचते मंत्री ने गगनदीप को धमकाना शुरू कर दिया, पिता श्री को ठेका न देने से क्या परिणाम हो सकते हैं, इसके बारे में कुछ मौखिक रूप से और कुछ क्रियात्मक रूप से बताना शुरू कर दिया। घर वालों का यह भी आरोप है कि यहां तक धमकियां दी गईं कि यदि पिता को ठेका न मिला तो तुम्हारा दाना पानी भी खत्म हो जाएगा। हद तो यह थी कि मंत्री जिला मैनेजर से वह काम करवाना चाहता था जो जिला मैनेजर के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं था। गगनदीप सिंह की पत्नी का कहना है कि उसके पति को मंत्री ने अपने पास बुला कर उससे मारपीट ही नहीं की, बल्कि यहां तक कह दिया कि यदि काम न हुआ तो तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का ऐसा हश्र होगा जिसकी तुमने कल्पना भी नहीं की होगी। डा. गगनदीप रंधावा शायद यह अनुचित दबाव झेल नहीं पाया। उसने शायद अनुमान लगा लिया था कि अब यदि वह जिंदा भी रहा तो सत्ता के मद से ग्रस्त मंत्री उसका जीना मुहाल कर देगा। उसने खुद ही इस संसार से रुखसत हो जाने का निर्णय कर लिया और जहर खाकर आत्महत्या कर ली। जाहिर है सत्ता उन लोगों के हाथ आ गई थी जिनके लिए सत्ता सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी तिजोरियां भरने का माध्यम बन गई है।

तिजोरियां भी अहंकार ग्रस्त मानसिकता से सार्वजनिक रूप से डरा धमका कर। इसे एक प्रकार से फिरौती मांगने का नया तरीका कहा जा सकता है। इस बार फिरौती में पिता के नाम पर ठेका मांगा गया था। न मिलने पर हत्या नहीं की गई, बल्कि कहा गया तुम खुद आत्महत्या करो। यह बहुत ही क्रूर और अमानवीय आचरण है। लेकिन इससे जो आगे हुआ, उसने आम आदमी पार्टी को पूरे रूप में नंगा कर दिया। गगनजीत सिंह ने मरने से पहले वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिया था जिसमें उसने अपनी आत्महत्या के लिए मंत्री लाल जीत सिंह भुल्लर को जिम्मेवार ठहराया है। लेकिन हैरानी तो तब हुई जब पुलिस इसके बाद भी चुप रही। कथित अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, इसके लिए भी परिवार को एक प्रकार से धरना ही देना पड़ा। तब कहीं जाकर पंजाब सरकार ने पर्चा दर्ज किया। पर्चा दर्ज करने के बाद पंजाब सरकार फिर सो गई। गगनदीप सिंह के परिवार को एक बार फिर धरना देना पड़ा कि मंत्री और उसके पिता को गिरफ्तार किया जाए। लेकिन इसके लिए आम आदमी पार्टी की सरकार तैयार नहीं थी। मामला लंबा खिंच गया।

यहां तक कि लोकसभा में भी यह मामला उठा। लोकसभा में कुछ सांसदों की मांग थी कि पंजाब सरकार तो इस मामले में खुद परोक्ष रूप से एक पार्टी है, इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए। गृहमंत्री अमित शाह ने कह दिया कि सांसद लिख कर यदि यह मांग करेंगे तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा। तब पंजाब सरकार तुरंत हरकत में आ गई। यदि सीबीआई के पास मामला चला गया तो न जाने इसके तार किस किस से जुड़े मिलने लगेंगे। पंजाब सरकार ने घोषणा कर दी कि मंत्री को पकड़ लिया गया है। और सचमुच उसको पकड़ भी लिया गया। लाल जीत सिंह भुल्लर को भी शायद अनुमान लग गया होगा कि अब उसकी राजनीति खत्म हो गई है। इसलिए उसने अपनी ही सरकार के झूठ का पर्दाफाश कर दिया कि मुझे किसी ने गिरफ्तार नहीं किया, मैंने खुद ही समर्पण किया है। बाकी जहां तक केजरीवाल का सवाल है, वे इस पूरे अमानवीय कांड के बाद भी अपनी कैसेट बजा रहे हैं, हमने तुरंत एक्शन लिया। आम आदमी पार्टी इतनी जल्दी इतनी असंवेदनशील हो जाएगी, ऐसा किसी को अनुमान नहीं था।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री

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