गुवाहाटी: असम की आर्थिक राजधानी गुवाहाटी में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। कुमार भास्कर वर्मा सेतु ने शहर के दक्षिणी और उत्तरी किनारों के बीच की दूरी को न सिर्फ कम किया है, बल्कि लोगों की जिंदगी को भी आसान बना दिया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस आधुनिक पुल का उद्घाटन 14 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह अत्याधुनिक पुल न केवल ट्रैफिक जाम और लंबी यात्रा से राहत देता है, बल्कि व्यापार, शिक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी को भी नई रफ्तार प्रदान करता है। इसे गुवाहाटी के विकास का असली गेम चेंजर माना जा रहा है।
पुल की खासियत
पहले गुवाहाटी से उत्तरी गुवाहाटी तक पहुंचना काफी मुश्किल था। लोगों को या तो फेरी सेवा का सहारा लेना पड़ता था या फिर सरायघाट पुल से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। 1962 में बना यह पुल वर्षों तक एकमात्र विकल्प रहा। बारिश और बाढ़ के दौरान फेरी सेवा बंद हो जाती थी। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती थी। करीब 1.24 किलोमीटर लंबा और 6-लेन वाला यह एक्स्ट्राडोज्ड पुल 3,030 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। यह पुल 8.4 किलोमीटर लंबे कनेक्टिविटी कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके शुरू होने से अब यात्रा का समय 45-60 मिनट से घटकर सिर्फ 7-10 मिनट रह गया है।
यह पुल किसी वरदान से कम नहीं
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल किसी वरदान से कम नहीं है। उत्तरी गुवाहाटी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी जैसे प्रमुख संस्थान स्थित हैं। यहां रोजाना सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। इस पुल के बनने से शिक्षा और रोजगार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिली है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही इस पुल को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा जता चुके थे।
सरकार की है योजना
सरकार अब कई सरकारी दफ्तरों और हाई कोर्ट को उत्तरी गुवाहाटी में शिफ्ट करने की योजना बना रही है, जिससे शहर के दक्षिणी हिस्से पर दबाव कम होगा। इस पुल के बनने के बाद उत्तरी गुवाहाटी में रियल एस्टेट की कीमतों में तेजी आई है और विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।

