पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 38424 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया है। लेकिन अभी रक्षा मजबूती के लिए मीलों चलना बाकी है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आधुनिक हथियारों का मजबूत स्वदेशीकरण किया जाना होगा। भारत को सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साथ एआई, साइबर तकनीक,आधुनिक मिसाइलों से सुसज्जित होना होगा…
यकीनन इस समय पश्चिम एशिया सहित पूरी दुनिया में बढ़ते हुए युद्ध के दौर के बीच भारत की सीमाएं बढ़ती भूराजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर पहले से अधिक संवेदनशील हो गई हैं। हाल ही में अमरीका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड के द्वारा प्रस्तुत ‘एनुअल थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट 2026 में कहा गया है कि इस समय पाकिस्तान के द्वारा किया जा रहा परमाणु और पारंपरिक हथियारों का विस्तार भारत सहित दक्षिण एशिया और अमरीका के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। ऐसे में भारत के लिए आर्थिक शक्ति के साथ उन्नत परमाणु हथियारों से सुसज्जित मजबूत सैन्य शक्ति बनने की आवश्यकता उभरकर दिखाई दे रही है। हाल ही में जहां बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत तेज रफ्तार से विकास करते हुए वर्ष 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, वहीं संसदीय रक्षा समिति की रिपोर्ट में भविष्य के युद्धों में भारत की निर्णायक भूमिका के मद्देनजर भारत को स्वदेशी ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीकों का हब बनाए जाने की जरूरत बताई गई है। गौरतलब है कि भारत के पड़ोस में पाकिस्तान के द्वारा आधुनिक चीनी हथियारों से आतंक और घुसपैठ को प्रश्रय और चीन की ओर से सीमा पर आपत्तिजनक गतिविधियां भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो गई हैं।
जहां लद्दाख में चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ भागों पर कब्जा कर रखा है, वहीं अब चीन की नजर कराकोरम दर्रे पर भी है। जहां चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पकड़ मजबूत करने की राह पर आगे बढ़ा है, वहीं वह हिंद महासागर में ‘स्ट्रिंग ऑफ पल्र्स’ के जरिए भारत को घेरते हुए दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष 2025 में भारत के द्वारा पाकिस्तान को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के मद्देनजर जब 7 मई से ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था, तब पाकिस्तान का साथ देने के लिए चीन, तुर्किये और अजरबैजान का खतरनाक गठजोड़ सामने आया था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को साइबर स्पोर्ट, उपग्रह के जरिए खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी। अब पाकिस्तान के द्वारा चीन के सहयोग से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हथियार विकसित किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता भी किया है। यह पूरा परिदृश्य भारत के लिए दशकों से चली आ रही शांतिप्रियता की नीति में आमूलचूल बदलाव की जरूरत बता रहा है। नि:संदेह कई दशकों से भारत पंचशील के वाहक देश के रूप में विदेशी आतंक और विदेशी अतिक्रमणों को भी धैर्यपूर्वक सहन करने की मानसिकता के साथ आगे बढ़ता रहा है, लेकिन हाल ही के वर्षों में ऐसी मानसिकता में बहुत कुछ बदलाव आया है। नि:संदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक पिछले 12 वर्षों में सरकार ने एक ओर आर्थिक तो दूसरी ओर सामरिक क्षेत्र को मजबूत बनाया है। भारत ने आतंकवाद के प्रति कठोर नीति अपनाई है। आपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने महज 22 मिनट में स्वदेशी हथियारों से दुश्मन को घुटने टेकने पर मजूबर कर दिया था। वस्तुत: आपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने एआई के उपयोग से पाकिस्तान के लक्षित आतंकी ठिकानों को बर्बाद करके अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। अब भारत को यह दृढ़ता से स्वीकार करना होगा कि भारत के साथ पड़ोसियों के टकराव की स्थिति और बढ़ सकती है। ऐसे में भारत के लिए तेज आर्थिक विकास के साथ युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था को तैयार करने, मजबूत सैन्य शक्ति व उन्नत परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने के लिए रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढऩा जरूरी दिखाई दे रहा है। अभी भारत को तेज विकास के साथ पड़ोसियों से सैन्य चुनौतियों के मुकाबले के मद्देनजर लंबा सफर तय करना है।
इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भी भारत अपने बहुआयामी आर्थिक आधारों से अर्थव्यवस्था को तेज गिरावट से बचाए हुए है। अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था दूसरे देशों के मुकाबले तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। दुनिया की क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर के 6.5 फीसदी होने संबंधी अनुमान प्रस्तुत कर रही हैं। भारत का मजबूत घरेलू बाजार, सरकार के भारी पूंजीगत व्यय, रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और विदेशी मुद्रा भंडार में 680 अरब डॉलर से अधिक का संचय युद्ध की मुश्किलों के बीच भारत का सहारा है। साथ ही भारत को बाहरी आर्थिक झटकों को झेलने की मजबूत स्थिति में बनाए हुए है। लेकिन अभी देश को तीसरी बड़ी आर्थिकी व आर्थिक शक्ति बनाने के लिए रफ्तार से बढऩा होगा। जेन-जी युवाओं को देश की नई आर्थिक शक्ति बनाना होगा। निश्चित रूप से हमें युद्ध पर आधारित ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में भी तैयार होना होगा, जहां जरूरत पडऩे पर तेजी से औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए युद्ध सामग्री का निर्माण हो सके। हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से रक्षा इकाइयों को तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के साथ जोडक़र सैन्य साजो सामान को अत्याधुनिक बनाने की डगर पर तेजी से बढऩा होगा। देश में साइबर और सूचना युद्ध क्षमताओं को तेजी से विस्तारित करना होगा। हमें ध्यान देना होगा कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते, वरन ये मिसाइलों व ड्रोन के इस्तेमाल से हवा, समुद्र तथा साइबर स्पेस में भी लड़े जाते हैं। अतएव हमें हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्वार्म ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई क्षमताओं के साथ आगे बढऩा होगा। इस परिप्रेक्ष्य में हाल ही में 3 अप्रैल को भारत की स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल करना महत्वपूर्ण है। यह भी सुकूनदायक है कि भारत ने पिछले एक दशक में खुद को रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े आयातक से निर्यातक के रूप में सफलतापूर्वक बदला है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 38424 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया है। लेकिन अभी रक्षा मजबूती के लिए मीलों चलना बाकी है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आधुनिक हथियारों का मजबूत स्वदेशीकरण किया जाना होगा। न केवल भारत को सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साथ एआई, साइबर तकनीक और आधुनिक मिसाइलों से सुसज्जित होना होगा, वरन उन्नत परमाणु शक्ति बनने की डगर पर भी आगे बढऩा होगा।
उल्लेखनीय है कि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक अब परमाणु हथियारों की संख्या में कमी का युग खत्म हो रहा है। अब परमाणु हथियारों में वृद्धि और उन्हें उन्नत बनाने की प्रवृत्ति दिख रही है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स की ‘स्टेटस ऑफ वल्र्ड न्यूक्लियर फोर्सेज’ रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सैन्य शक्ति के आधार पर अमरीका शीर्ष पर है। परमाणु हथियारों के मद्देनजर रूस पहले स्थान पर है और अमरीका दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन तीसरे, फ्रांस चौथे, ब्रिटेन पांचवें, भारत छठे, पाकिस्तान सातवें, इजरायल आठवें और उत्तरी कोरिया नौवें स्थान पर है। अमरीका और रूस के पास दुनिया के करीब 90 प्रतिशत परमाणु हथियार हैं। चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। भारत के पास 180 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं। ऐसे में अब भारत को एक उन्नत परमाणु शक्ति बनने के लिए थोरियम और उन्नत रिएक्टरए फास्ट ब्रीडर रिक्टरों और स्मॉल माडयूलर रिएक्टरों के विकास में तेजी लानी होगी।-डा. जयंती लाल भंडारी

