पुरी: जगन्नाथ मंदिर में दर्शन की आस लेकर पहुंचे विजय सिंह चौहान के परिवार के साथ परिसर में जो हुआ, वह किसी भी श्रद्धालु का दिल दहला देगा। उनकी 15 साल की बेटी आरुषि उमस और भीड़ में चार बार बेहोश हुई, लेकिन मदद के बजाय वहां तैनात पंडा और सुरक्षाकर्मियों ने गालियां देते हुए पूरे परिवार को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। बिना दर्शन किए, अपमान का घूंट पीकर लौटा यह परिवार अब इंसाफ की भीख मांग रहा है।
ASI का टालमटोल रवैया
जब पीड़ित परिवार सिंहद्वार थाने पहुंचा तो वहां न्याय के बजाय मौजूद ASI अरुण कुमार की नसीहत मिली। थाने में तैनात ASI रैंक के पुलिसकर्मी अरुण कुमार ने कहा कि ‘दिनभर में ऐसे 12 से 15 मामले आते हैं, यह कोई नई बात नहीं है।’ एक जिम्मेदार अधिकारी का यह बयान साबित करता है कि पुरी प्रशासन ने श्रद्धालुओं के अपमान को रूटीन मान लिया है।
पैसे लेकर दर्शन कराते हैं पंडे
पीड़ित पिता का आरोप है कि जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के पास पंडा और सुरक्षाकर्मी मिलकर सिंडिकेट चला रहे हैं। जो पैसा देता है या जिसका रसूख है, उसके लिए रास्ते साफ हैं, लेकिन जो आम आदमी अपनी बीमार बेटी के लिए सिर्फ दर्शन की भीख मांग रहा है, उसे धक्के मिलते हैं। बेटी आरुषि के शरीर पर मौजूद खरोंच के निशान उन सुरक्षाकर्मियों की दरिंदगी की कहानी कह रहे हैं, जिनका दिल मासूम की चीखों से भी नहीं पसीजा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
यह घटना केवल एक परिवार के अपमान की नहीं, बल्कि पुरी जगन्नाथ मंदिर के सुरक्षा तंत्र और प्रबंधन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। पीड़ित परिवार ने शिकायत पत्र में पुलिस से सीसीटीवी देखने की भी बात कही लेकिन पुलिस ने इस बात को भी अनसुना कर दिया। खबर लिखे जाने तक, इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि पीड़ित परिवार अब भी न्याय की आस में भटक रहा है।

