चेन्नई: पश्चिम बंगाल के बाद अब केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) का तमिलनाडु में एक्शन सामने आया है। चुनाव आयोग ने बुधवार को तमिलनाडु के मुख्य सचिव और डीजीपी को हटा दिया था। आयोग के इस फैसले पर डीएमके प्रमुख और सीएम एम के स्टालिन ने पक्षपात का आरोप लगाया है। तमिलनाडु विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग ने बुधवार को राज्य के मुख्य सचिव एन. मुरुगानंदन की जगह वरिष्ठ नौकरशाह एम. साई कुमार को और डीजीपी (सशस्त्र पुलिस, सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक) एस. डेविडसन देवसीर्वाथम की जगह 1995 बैच के IPS अधिकारी संदीप मित्तल को नियुक्त किया।
कोई पद नहीं सौंपने का दिया है निर्देश
केंद्रीय चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को भेजे गए एक औपचारिक संदेश में चुनाव आयोग की सचिव लता त्रिपाठी ने निर्देश दिया कि 1990 बैच के आईएएस अधिकारी एम. साई कुमार को तत्काल प्रभाव से राज्य के शीर्ष नौकरशाह के रूप में तैनात किया जाए। चुनाव आयोग ने आगे यह भी निर्देश दिया कि हटाए गए अधिकारियों को मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव से संबंधित कोई भी पद न सौंपा जाए। आयोग ने यह कदम विपक्ष की कई शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य का प्रशासनिक तंत्र डीएमके सरकार के पक्ष में काम कर रहा है। केंद्रीय चुनाव आयोग केइस फैसले पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
क्या EPS की मदद के लिए ऐसा किया गया?
स्टालिन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा किए गए तबादले, विशेष रूप से सेलम जैसे स्थानों पर AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी और एनडीए गठबंधन को फायदा पहुंचाने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत किए गए हैं। सेलम की कलेक्टर वृंदा रवि का तबादला एक दिन पहले ही किया गया था और उनकी जगह अरुण थंबुराज को तैनात किया गया। मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या यह सब ईपीएस की मदद करने के लिए किया जा रहा है? क्या बिहार चुनावों के दौरान भी मुख्य सचिव और डीजीपी का तबादला इसी तरह किया गया था? यह डीएमके की जीत को रोकने की एक साफ कोशिश है, लेकिन वे बुरी तरह नाकाम होंगे।

