Crude oil price, सोमवार की सुबह शेयर बाजार खुलते ही तेल कंपनियों के निवेशकों को बड़ा झटका लगा। HPCL, BPCL और IOC तीनों के शेयर धड़ाम से गिर गए। इसके पीछे वजह यह है कि कच्चे तेल ने फिर 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह बेकार गई है। बातचीत टूटी और उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ऐलान कर दिया कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी शुरू करेगी। यानी ईरान का तेल बाहर नहीं जाएगा। इस खबर से तेल बाजार में आग लग गई।

तेल कंपनियों के शेयर टूटे

HPCL का शेयर 4% टूटकर 345.20 रुपये पर आ गए। BPCL 3% से ज्यादा गिरकर 284.25 रुपये पर पहुंचा। IOC भी 3% टूटकर 138.60 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दूसरी तरफ ONGC और OIL जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयर करीब 1% ऊपर थे, क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने पर इन्हें फायदा होता है।

मिडिल ईस्ट में राहत के संकेत नहीं

तकनीकी रूप से युद्धविराम अभी भी कागज पर जिंदा है, लेकिन बाजार इसे मानने को तैयार नहीं है। जैसे ही सीजफायर का ऐलान हुआ था, तेल की कीमतें एक ही दिन में 15% तक गिर गई थीं। अब वही कीमतें फिर 8% उछलकर वापस आ गई हैं। क्योंकि बाजार जानता है कि ये शांति कितनी कमजोर है।

ट्रंप ने खुद माना है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों तक तेल और पेट्रोल के दाम ऊंचे रह सकते हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी चेतावनी दी है कि होर्मुज के पास कोई भी सैन्य जहाज आया तो उसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और सख्त जवाब दिया जाएगा।

आगे कहां जाएंगी कीमतें?

ब्रोकरेज फर्म Macquarie का कहना है कि तनाव कम हो भी गया तो तेल 85-90 डॉलर के बीच टिका रहेगा। अगर होर्मुज स्ट्रेट की बाधा अप्रैल तक जारी रही, तो ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर तक जा सकता है। Kotak Securities की कायनात चेनवाला का अनुमान है कि नजदीकी समय में तेल 120 डॉलर तक जा सकता है और संघर्ष लंबा खिंचा तो 150 डॉलर भी दूर नहीं है। Nuvama Institutional Equities की भी यही राय है।

होर्मुज स्ट्रेट से रोज करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। इसकी नाकेबंदी का मतलब है- दुनिया के तेल बाजार में भूकंप। Religare Broking के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजित मिश्रा कहते हैं कि मौजूदा सीजफायर वक्ती है। तेल की कीमतें 70-75 डॉलर के स्तर पर वापस आने में कई महीने लग सकते हैं। फिलहाल 80-100 डॉलर की रेंज में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

OMC कंपनियों पर क्यों पड़ती है मार?

IOC, BPCL और HPCL ये तीनों कच्चे तेल को खरीदकर पेट्रोल-डीजल बनाती हैं और बेचती हैं। जब कच्चा तेल महंगा होता है और ये कंपनियां दाम नहीं बढ़ा पातीं, तो मुनाफा सीधे घटता है। निवेशक इसे भांप लेते हैं और शेयर बेचने लगते हैं। पिछले महीने ही UBS ने इन तीनों कंपनियों को डाउनग्रेड किया था। IOCL का टारगेट प्राइस 190 से घटाकर 175, BPCL का 425 से घटाकर 365 और HPCL का 540 से घटाकर 340 रुपये कर दिया गया था।

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