नई दिल्ली: अंतरिक्ष में अब ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि सैटेलाइट्स के बीच टक्कर का खतरा हर पल बना रहता है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपनी ताजा स्पेस सिचुएशन अवेयरनेस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इसरो ने बताया कि पिछले साल भारतीय सैटेलाइट्स को सुरक्षित रखने के लिए कुल 18 कोलिजन अवॉयडेंस मैन्यूवर (CAM) यानी टक्कर बचाव ऑपरेशन किए गए. इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि भविष्य के मिशन निसार और चंद्रमा की कक्षा में घूम रहे चंद्रयान-2 को भी इस खतरे का सामना करना पड़ा है.

निसार और चंद्रयान-2 पर मंडरा रहा था बड़ा खतरा

इसरो की रिपोर्ट के मुताबिक निसार सैटेलाइट के लिए नासा ने रिस्क मिटिगेशन मैन्यूवर की चेतावनी दी थी. यह सैटेलाइट पृथ्वी की निचली कक्षा में तैनात है जहां अंतरिक्ष मलबे की डेंसिटी सबसे ज्यादा है. वहीं दूसरी ओर चंद्रयान-2 ऑर्बिटर को भी चंद्रमा की कक्षा में दो बार अपनी स्थिति बदलनी पड़ी. 1 जनवरी और 24 जुलाई 2025 को नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर के साथ इसकी टक्कर की स्थिति बन रही थी. इसरो ने समय रहते अपनी ऑर्बिटल पोजीशन बदली और किसी भी अनहोनी को टाल दिया.

अंतरिक्ष में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए इसरो ने क्या रणनीति अपनाई?

  • इसरो को अमेरिकी स्पेस कमांड से करीब 1.5 लाख अलर्ट मिले थे. इन अलर्ट्स का एनालिसिस करने के बाद इसरो ने पाया कि कई बार सैटेलाइट्स एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं.
  • इसरो ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए 82 बार पुराने प्लान को रिवाइज किया. इससे यह सुनिश्चित किया गया कि एक टक्कर से बचने के चक्कर में सैटेलाइट किसी दूसरे मलबे से न टकरा जाए.
  • इसरो ने जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में भी 4 बार बचाव ऑपरेशन चलाए ताकि महत्वपूर्ण संचार सैटेलाइट्स को कोई नुकसान न पहुंचे.
  • नासा और इसरो के बीच तालमेल से बचा बड़ा नुकसान
  • स्पेस ऑपरेशंस में तालमेल सबसे ज्यादा जरूरी होता है. चंद्रयान-2 मिशन के दौरान इसरो ने नासा के साथ मिलकर काम किया. नासा ने प्राइवेट कंपनियों जैसे फायरफ्लाई एयरोस्पेस और इंट्यूटिव मशीन्स के साथ कम्युनिकेशन में मदद की. इससे लूनर ऑर्बिट में मौजूद सभी सैटेलाइट्स की लोकेशन का सटीक पता चला. इस को-ऑर्डिनेशन की वजह से ही भारत और अमेरिका के करोड़ों डॉलर के प्रोजेक्ट्स आज अंतरिक्ष में पूरी तरह सुरक्षित और एक्टिव मोड में काम कर रहे हैं.
  • कैसे इसरो अंतरिक्ष को कचरे से मुक्त रखने में मदद कर रहा है?
  • इसरो केवल अपने सैटेलाइट्स को ही नहीं बचा रहा बल्कि अंतरिक्ष को साफ रखने की जिम्मेदारी भी निभा रहा है. हाल ही में IRNSS-1D सैटेलाइट को उसकी लाइफ खत्म होने के बाद ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में भेज दिया गया. यह पहली बार है जब भारत ने किसी सैटेलाइट को पृथ्वी से 600 किलोमीटर ऊपर सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया है.
  • इसके अलावा साल 2025 में भारत के 12 पुराने ऑब्जेक्ट्स पृथ्वी के वातावरण में वापस लौटकर खत्म हो गए. इसरो का यह कदम जिम्मेदार स्पेस पावर बनने की दिशा में बहुत अहम है.
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
Exit mobile version